चुनाव आयोग की तरफ से बिहार के बाद अब यूपी और पश्चिम बंगाल समेत देशभर में SIR ड्राइव चलाई जा रही है. यूपी में एसआईआर की पहली ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई है, जिसमें दो करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं. ये ऐसे नाम हैं जो अपने दिए पते पर अनुपस्थित पाए गए या स्थानांतरित हो चुके हैं. कुछ मृत हैं तो कुछ मतदाता डुप्लिकेसी के चलते हटा दिए गए हैं. इसके बाद से कई लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि आखिर SIR क्या होता है, क्यों चलाया जाता है और इसका वोटर्स से क्या संबंध है. दरअसल जिसे चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में इसलिए लागू करता है ताकि वोटर लिस्ट सही, अपडेटेड और पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे.
क्या है SIR का फुलफॉर्म?
SIR का फुल फॉर्म है Special Intensive Revision यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण. ये एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. जिसका का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रह जाए और साथ ही पुरानी, गलत या डुप्लीकेट एंट्री को हटाया जा सके. उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में वोटर की आबादी काफी ज्यादा है. जिसके कारण समय के साथ कई नाम आउटडेटेड हो जाते हैं.
कई लोग एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैं या कुछ नाम गलती से सूची में बने रह जाते हैं. इसी वजह से SIR के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर घर घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की पुष्टि करते हैं. फॉर्म भरवाते हैं, गलत रिकॉर्ड ठीक करते हैं और नए 18+ वोटर्स को सूची में जोड़ते हैं. पहले की तुलना में ये प्रक्रिया अधिक सटीक और भरोसेमंद मानी जा रही है. क्योंकि इसमें मैन्युअल जांच की जगह व्यवस्थित फील्ड वेरिफिकेशन पर जोर दिया जाता है.
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ट्रांसपेरेंसी, तकनीक और नए वोटर्स पर खास फोकस
SIR के दौरान मतदाता अपने नाम की स्थिति ऑनलाइन भी देख सकते हैं और यदि उन्हें कोई गलती मिलती है तो वो क्लेम या ऑब्जेक्शन दर्ज कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन में EPIC से लिंक मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. जिससे वेरिफिकेशन प्रक्रिया तेज और सुरक्षित बनती है. इस पुनरीक्षण में फोटो मैचिंग, जीआईएस बेस्ड वेरिफिकेशन और बारकोड चेकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे डुप्लीकेट, फर्जी या निष्क्रिय एंट्री की पहचान आसानी से हो जाती है. चुनाव आयोग हटाए गए मतदाताओं की सूची भी सार्वजनिक करता है. ताकि पारदर्शिता बनी रहे और यदि किसी नाम को गलती से हटाया गया हो तो उसे अपील का अधिकार मिले. SIR में खासतौर पर युवा वोटर्स, माइग्रेंट वर्कर्स और छात्रों को शामिल करने पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाता है.














