Exit Poll और ओपिनियन पोल में क्या होता है अंतर? जानें कब हुई थी इनकी शुरुआत

Exit Poll And Opinion Poll: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होते ही एग्जिट पोल जारी हो रहे हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर ये एग्जिट पोल क्या होते हैं और ये ओपिनियन पोल से कितने अलग हैं.

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Exit Poll And Opinion Poll: क्या होते हैं एग्जिट पोल

Exit Poll And Opinion Poll: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब एग्जिट पोल जारी हो रहे हैं. तमाम एग्जिट पोल ये बता रहे हैं कि इस बार पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार बन सकती है. देशभर में होने वाले हर चुनाव में आपने एग्जिट पोल का नाम जरूर सुना होगा, इसके अलावा ओपिनियन पोल भी खूब चर्चा में रहते हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में क्या अंतर होता है. साथ ही ये भी जानेंगे कि दोनों कब जारी किए जाते हैं और इन्हें लेकर नियम क्या हैं. 

ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल का काम चुनावी अनुमान लगाना होता है, इसमें ये बताया जाता है कि राज्य में हवा किस तरफ बही और लोगों के मन में कौन सी पार्टी थी. इन दोनों के तरीके अलग होते हैं और इनमें काफी अंतर होता है. 

क्या होता है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल वोटिंग के दिन किया जाता है. जैसा कि नाम से पता चलता है, यह सर्वे तब होता है जब मतदाता अपना वोट डालकर मतदान केंद्र (Polling Station) से 'एग्जिट' यानी बाहर निकलता है. वोट डालने के तुरंत बाद लोगों के मन को टटोलने की कोशिश होती है. ओपिनियन पोल की तुलना में इसे ज्यादा सटीक माना जाता है, क्योंकि इसमें सैंपल डेटा में वो लोग शामिल होते हैं, जो अपना वोट डाल चुके हैं. 

ओपिनियन पोल क्या होता है? 

जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि ओपनियन पोल में लोगों से उनकी राय पूछी जाती है. ये पोल चुनाव होने से पहले किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि जनता का मूड क्या है और वो किस पार्टी या उम्मीदवार को पसंद कर रहे हैं. आमतौर पर सर्वे टीम इसमें लोगों से सवाल करती है कि इस चुनाव में वो किसे वोट देने का विचार कर रहे हैं. आमतौर पर ओपिनियन पोल चुनाव का ऐलान होने के बाद और वोटिंग शुरू होने से पहले होते हैं. इससे उम्मीदवारों को भी जनता की नब्ज का अंदाजा लगता है और वो अपनी रणनीति में बदलाव करते हैं. 

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क्या कहते हैं नियम?

एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक एग्जिट पोल तब तक जारी नहीं हो सकते हैं, जब तक कि चुनाव के सभी चरण खत्म न हो चुके हों. यही वजह है कि वोटिंग के आखिरी दिन इन्हें जारी किया जाता है. वहीं ओपिनियन पोल पर मतदान से कुछ समय पहले रोक लग जाती है. 

कब हुई थी पोल की शुरुआत?

भारत में पहली बार 1957 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन ने एक पोल कराया था, तब इसे एग्जिट पोल का नाम नहीं दिया गया था. इसके बाद एग्जिट पोल 1980 के दौर से कुछ हद तक शुरू हुए और 1996 के चुनाव में  सबसे ज्यादा चर्चा में आए. तब सर्वे सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) ने ये सर्वे किया था, जिसे दूरदर्शन पर दिखाया गया. ये सर्वे लगभग सटीक बैठा और इसके बाद एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल्स की शुरुआत हो गई. तब से लेकर आज तक हर चुनाव के दौरान इस तरह के सर्वे होते हैं. 

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