Mohammad Deepak Case: उत्तराखंड के कोटद्वार में हिंदू संगठनों के कुछ लोगों के सामने खड़े होकर खुद का नाम मोहम्मद दीपक बताने वाले युवक को हाईकोर्ट से झटका लगा है. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जिम ओनर 'मोहम्मद दीपक' के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है और उनके खिलाफ गैग ऑर्डर (Gag Order) जारी कर दिया. एफआईआर रद्द करने से इनकार तो लोगों को समझ आ जाता है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर ये गैग ऑर्डर क्या होता है. आइए जानते हैं कि कोर्ट इसे कब जारी करते हैं और इसके बाद क्या नहीं किया जा सकता है.
क्या होता है गैग ऑर्डर?
गैग ऑर्डर एक कानूनी प्रतिबंध है, जिसे कई आरोपियों के खिलाफ लगाया जाता है. इसका सीधा मतलब है कि जिस शख्स का कोर्ट में मामला लंबित है, वो अपने उस मामले को लेकर कोर्ट से बाहर कुछ भी सार्वजनिक तौर पर नहीं बोल सकता है. कोटद्वार के दीपक ने इस मामले को लेकर कई इंटरव्यू दिए हैं और यहां तक कि राहुल गांधी से भी मुलाकात की. हालांकि अब वो ऐसा कुछ भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ गैग ऑर्डर जारी कर दिया है. गैग शब्द का मतलब मुंह बंद करना होता है.
क्यों जारी होता है गैग ऑर्डर?
हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट कई संवेदनशील मामलों में गैग ऑर्डर जारी करते हैं. इससे मीडिया का प्रभाव और भ्रामक या सनसनीखेज जानकारी पर रोक लगाने की कोशिश होती है. कई मामलों में आरोपियों को जमानत देने पर भी इसकी शर्त जोड़ी जाती है. गैग का उल्लंघन करने का मतलब अदालत की अवमानना हो सकता है.
क्या है 'मोहम्मद दीपक' वाला मामला?
दरअसल कुछ हफ्ते पहले उत्तराखंड के कोटद्वार में हिंदू संगठन के कुछ लोग एक मुस्लिम दुकानदार को धमका रहे थे, उनका कहना था कि उसकी दुकान का नाम बाबा नहीं हो सकता है. इसी बीच कोटद्वार में जिम चलाने वाले दीपक वहां पहुंच गए और मुस्लिम बुजुर्ग के समर्थन में खड़े हो गए. जब बुजुर्ग को धमका रहे लोगों ने दीपक से उनका नाम पूछा तो उन्होंने जानबूझकर अपना नाम 'मोहम्मद दीपक' बताया. इसके बाद ये मामला काफी बढ़ गया और कोटद्वार में कई दिनों तक तनाव रहा. राहुल गांधी जैसे कई विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर पोस्ट किए और दीपक की तारीफ की.
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