गजनवी के हमले से लेकर नेहरू की चिट्ठी तक, सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ये बातें नहीं जानते होंगे आप

आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने शुरू किया था. आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार पटेल के संकल्प से हुआ था. भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मौजूदा मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की थी.  

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सोमनाथ मंदिर को कुल 17 बार हमले का सामना करना पड़ा.

गुजरात के गिर में सोमनाथ जिले के वेवावल शहर के पास सोमनाथ मंदिर स्थित है. इस समय यहां पर 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' चल रहा है. देशभर से हजारों भक्त 72 घंटे तक ओंकार जाप में शामिल हुए हैं. ये पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी तक सोमनाथ में मनाया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. दरअसल यहां पर महाआरती की जाएगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे. आज हम आपको सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे. 

सोमनाथ महादेव मंदिर का इतिहास

सोमनाथ मंदिर पहला आदि ज्योतिर्लिंग है. कहा जाता है कि इसी जगह पर चंद्रमा ने तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था. साथ ही अंधेरे के श्राप से मुक्त कर दिया था.  ये भी कहा जाता है कि यह वह स्थान है, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंतिम यात्रा की थी.  सोमनाथ का तट मंदिर 4 चरणों में बनाया गया था. भगवान सोम द्वारा सोने से, रवि द्वारा चांदी से, भगवान कृष्ण द्वारा लकड़ी से और राजा भीमदेव द्वारा पत्थर से.

सोमनाथ मंदिर पर कितनी बार हुआ हमला

सोमनाथ मंदिर पर कई बार आक्रमण भी किए गए हैं. इस मंदिर को कुल 17 बार हमले का सामना करना पड़ा.  11वीं से 18वीं शताब्दी ई. में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने मंदिर को हमले में बुरी तरह से तबाह कर दिया था.  इतिहास की कई किताबों के अनुसार 1025-1026 में सोमनाथ पर गजनवी साम्राज्य के शासक महमूद गजनवी ने हमला किया था. इस दौरान गुजरात के चालुक्य वंश ने इसका विरोध भी किया था. हर बार लोगों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया.

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किसने किया

आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने शुरू किया था. आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार पटेल के संकल्प से हुआ था. भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति, स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मौजूदा मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की थी.  

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सोमनाथ मंदिर को लेकर जवाहरलाल नेहरू के पत्र में क्या है

अप्रैल 1951 में जवाहरलाल नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और कहा कि जो कुछ सोमनाथ मंदिर के लिए हो रहा है, वह बिल्कुल गलत है. भाजपा सांसद डॉ. त्रिवेदी ने एक पत्र साझा करते हुए दावा किया कि पंडित नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान पत्र लिखा था. जिसमें कहा था कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ नहीं हो रहा.

'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' क्या है

स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत 8 से 11 जनवरी तक इस मंदिर में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहा है. लगभग 2,500 (युवा पुजारी 72 घंटों तक निरंतर ओंकार मंत्र का जाप करने के लिए मंदिर में एकत्र हुए हैं.

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