No-Confidence Motion: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, बताया जा रहा है कि इसे लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दल तैयारी कर चुके हैं. स्पीकर पर आरोप लगे हैं कि वो विपक्ष के साथ भेदभाव करते हैं और सांसदों को बोलने का मौका कम देते हैं. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब किसी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा हो. संसद के इतिहास में कई बार ऐसा हो चुका है. पहली बार जवाहरलाल नेहरू की सरकार में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. आइए जानते हैं कि ये अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है और अब तक कितने लोकसभा अध्यक्षों के खिलाफ इसे लाया गया है.
क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव?
अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय परंपरा का ही एक हिस्सा है. जब भी विपक्ष को सरकार या फिर स्पीकर पर भरोसा नहीं होता है तो उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत लाया जाता है, इसे मोशन ऑफ रिमूवल कहा जाता है. इसके तहत लोकसभा के स्पीकर को हटाया जा सकता है. वोटिंग में बहुमत मिलने पर अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
पहली बार कब लाया गया अविश्वास प्रस्ताव?
भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार साल 1954 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. लोकसभा के पहले स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ ये प्रस्ताव लाया गया था. सोशलिस्ट पार्टी के नेता विग्नेश्वर मिसिर ये प्रस्ताव लाए थे. इस प्रस्ताव पर करीब दो घंटे तक चर्चा हुई थी, हालांकि बाद में उसे खारिज कर दिया गया. इस प्रस्ताव को जवाहर लाल नेहरू ने सदन की गरिमा का सवाल बताया था.
इनके खिलाफ भी लाया गया प्रस्ताव
साल 1954 के बाद स्पीकर के खिलाफ दूसरा प्रस्ताव 1966 में लाया गया. लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह के खिलाफ ये प्रस्ताव था. वहीं तीसरी बार 1987 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. ये प्रस्ताव तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ लाया गया था. पिछले तमाम प्रस्तावों की तरह ये अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज हो गए थे.
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