लद्दाख में दिखा खौफनाक लाल आसमान, 2003 के बाद आया सबसे बड़ा सौर तूफान, क्या है खतरा?

Solar Storm 2026 : लद्दाख में दिखा यह लाल नजारा दरअसल 'अरोरा' (Aurora) था, जिसे हम आसान भाषा में 'ध्रुवीय ज्योति' भी कहते हैं. 18 जनवरी को सूरज पर एक बहुत बड़ा धमाका हुआ, जिसे 'X-class solar flare' कहा जाता है.

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लद्दाख के हानले (Hanle) की रातें आमतौर पर घने अंधेरे और चमकते सितारों के लिए जानी जाती हैं.

लद्दाख के हानले (Hanle) की रातें आमतौर पर घने अंधेरे और चमकते सितारों के लिए जानी जाती हैं. लेकिन 19 और 20 जनवरी की रात यहां का नजारा कुछ अलग ही था. आसमान गहरा नीला नहीं, बल्कि खून की तरह लाल दिखाई दे रहा था. सोशल मीडिया पर लोग इन तस्वीरों को देखकर हैरान हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि सूरज के गुस्से का संकेत है.

आखिर क्यों लाल हो गया आसमान?

लद्दाख में दिखा यह लाल नजारा दरअसल 'अरोरा' (Aurora) था, जिसे हम आसान भाषा में 'ध्रुवीय ज्योति' भी कहते हैं. 18 जनवरी को सूरज पर एक बहुत बड़ा धमाका हुआ, जिसे 'X-class solar flare' कहा जाता है. इस धमाके से सौर गैस और चुंबकीय क्षेत्रों का एक विशाल गुब्बारा निकला, जिसे विज्ञान की भाषा में 'कोरोनल मास इजेक्शन' (CME) कहते हैं.

यह सौर तूफान करीब 1,700 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ा और सिर्फ 25 घंटों में हमारे वायुमंडल से टकरा गया. जब ये सौर कण हमारे वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन से टकराए, तो 300 किलोमीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर लाल रोशनी पैदा हुई. आमतौर पर ध्रुवीय इलाकों में यह हरा दिखता है, लेकिन लद्दाख जैसी जगहों पर हमें इसका ऊपरी हिस्सा लाल रंग में दिखाई देता है.

क्या यह हमारे मोबाइल और बिजली के लिए खतरा है?

देखने में भले ही यह सुंदर लगे, लेकिन यह जनवरी 2026 का तूफान S4 श्रेणी का एक गंभीर रेडिएशन तूफान था. इसरो (ISRO) और नासा (NASA) के डेटा के मुताबिक, ऐसे तूफान पृथ्वी की सुरक्षा कवच (मैग्नेटिक शील्ड) को दबा देते हैं. इससे कई खतरे पैदा हो सकते हैं:

सैटेलाइट पर असर: अंतरिक्ष में मौजूद हमारे सैटेलाइट सीधे तौर पर सौर हवाओं की चपेट में आ सकते हैं.

इंटरनेट और बैंकिंग: जीपीएस (GPS), इंटरनेट और बैंकिंग सिस्टम ठप हो सकते हैं.

बिजली गुल: पावर ग्रिड में करंट बढ़ सकता है, जिससे ट्रांसफार्मर जल सकते हैं और बड़े इलाकों में ब्लैकआउट हो सकता है.

अंतरिक्ष यात्रियों को खतरा: इस तूफान के दौरान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित ठिकानों में शरण लेनी पड़ी.

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भारत कैसे कर रहा है अपनी सुरक्षा?

भारत अब इन अंतरिक्ष के खतरों से निपटने के लिए तैयार है. हमारा Aditya-L1 मिशन अंतरिक्ष में एक संतरी की तरह तैनात है. यह तूफान के पृथ्वी तक पहुंचने से 24 से 48 घंटे पहले ही चेतावनी दे सकता है. इससे हमें सैटेलाइट्स को 'सेफ मोड' में डालने और पावर ग्रिड को बचाने का समय मिल जाता है.

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