जापान के पास नहीं है अपनी सेना, फिर भी कैसे सुरक्षित है ये देश? जानिए यहां

जापान की अपनी आर्मी नहीं है, फिर भी वह दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक कैसे है? इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध और रणनीतिक साझेदारी शामिल हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
साल 2014 में इस नियम की व्याख्या बदलते हुए जापान ने कलेक्टिव सेल्फ डिफेंस का अधिकार भी जोड़ा.

Japan security system : पीएम नरेंद्र मोदी इस समय जापान दौरे पर हैं. इस दौरान भारत-जापान की टेक्नोलॉजी, इकनॉमी और सुरक्षा साझेदारी पर खास बातचीत हो सकती है. खास बात ये है कि एशिया का इतना अहम और आर्थिक रूप से सक्षम देश होने के बावजूद जापान के पास खुद की ऐसी सेना नहीं है, जो उसे बाहरी आक्रमण से उसकी रक्षा करती हो. ऐसे में ये सवाल उभरता है कि जब जापान के पास खुद की आर्मी ही नहीं है, तो वह अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता है? इसी के बारे में हम आपको आज इस लेख में बताने जा रहे हैं...

डोनाल्ड ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत में किया राजदूत नियुक्त, जानें इन्हें कितनी मिलती है सैलरी?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना सख्त नियम

सेकंड वर्ल्ड वॉर में जापान की भूमिका के बारे में सभी जानते हैं. जापान एक्सिस पावर्स का एक प्रमुख देश था और इसलिए जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर को परमाणु हमले तक झेलने पड़े, जो अब तक के इतिहास के सबसे बड़ी युद्ध त्रासदी मानी जाती है.

द्वितीय विश्व युद्ध में हार के बाद 1945 से 1952 तक जापान पर मित्र राष्ट्रों, विशेषकर अमेरिकी सेनाओं का कब्ज़ा रहा. इसी दौरान, 1946 में जापानी संविधान का मसौदा तैयार किया गया, जिसे 3 नवंबर, 1946 को अपनाया गया और 3 मई, 1947 को लागू किया गया. इसमें आर्टिकल 9 जोड़ा गया, जिसमें लिखा गया कि जापान कभी युद्ध नहीं करेगा और उसके पास land, sea या air force जैसी कोई आर्मी नहीं होगी. इसका मकसद था कि जापान दोबारा युद्ध की राह पर न लौटे.

क्योंकि जापान को आर्मी रखने की इजाजत नहीं थी, इसलिए उसकी बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका ने ली. 1951 में हुई सुरक्षा संधि के बाद आज भी जापान में अमेरिकी सैनिक और सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. किसी भी बड़े हमले की स्थिति में अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह जापान की रक्षा करे.

JSDF: नाम अलग, काम वही

फिर भी, 1954 में जापान ने अपनी Japan Self-Defense Forces (JSDF) बनाई. नाम अलग है, लेकिन यह फोर्स आधुनिक और प्रशिक्षण में बहुत सक्षम है. फर्क केवल इतना है कि यह आर्मी नहीं, बल्कि सेल्फ डिफेंस के लिए बनी टुकड़ी है. इसका काम देश की रक्षा, प्राकृतिक आपदाओं में मदद और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियान तक सीमित है.

साल 2014 में इस नियम की व्याख्या बदलते हुए जापान ने कलेक्टिव सेल्फ डिफेंस का अधिकार भी जोड़ा. अब JSDF जरूरत पड़ने पर भारत जैसे गठबंधन सहयोगियों की मदद कर सकती है. लेकिन युद्ध में हमला करने या शामिल होने की अनुमति अभी भी नहीं दी गई है.

Advertisement

बदलती दुनिया, बदलती रणनीति

और हाल ही में, जून 2025 में, जापान ने पहली बार अपनी सीमा के भीतर एक मिसाइल परीक्षण भी किया. यह उसकी सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. पिछले कुछ सालों में, खासकर चीन और नॉर्थ कोरिया की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए, जापान ने अपनी रक्षा नीति पर दोबारा सोचने की शुरुआत की है. 2022 में जापान ने अपनी National Security Strategy को अपडेट किया, जिसमें साफ कहा गया कि रक्षा बजट बढ़ाकर जीडीपी का 2% किया जाएगा और साथ ही दुश्मन पर काउंटर स्ट्राइल करने की क्षमता भी तैयार की जाएगी.

Featured Video Of The Day
Bihar Politics: Lalu Yadav ने Nitish को कहा था 'BJP का पालतू', फिर क्यों मिलाया हाथ? | Varchasva