क्या सोने से बना होता है आपके फोन का सिम कार्ड? चीनी शख्स ने जमा कर लिया 26 लाख का गोल्ड

यह खबर ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे की बढ़ती अहमियत की ओर भी इशारा करती है. सही तरीके से रीसाइक्लिंग की जाए तो पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से कीमती धातुएं वापस निकाली जा सकती हैं. लेकिन यह काम केवल प्रशिक्षित और अधिकृत प्रोसेसिंग यूनिट्स में ही किया जाना चाहिए. 

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हां, उसमें सोने की बहुत मामूली मात्रा जरूर हो सकती है, लेकिन उससे सीधे पैसा कमाना आम लोगों के लिए संभव नहीं है.

Does a SIM card really contain gold : चीन में एक व्यक्ति के पुराने सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से सोना निकालने के दावे के बाद एक बड़ा सवाल चर्चा में है कि क्या मोबाइल फोन का सिम कार्ड वास्तव में सोने से बना होता है? अगर हां, तो कितना सोना होता है? और क्या इस सोने को निकालना मुमकिन है? इन सभी सवालों को समझना जरूरी है, क्योंकि कई लोग इस दावे को सीधे तौर पर सिम कार्ड में छुपे खजाने से जोड़कर देख रहे हैं. 

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क्या सच में सिम कार्ड में होता है सोना?

दरअसल, टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक चिप्स के कुछ हिस्सों पर बेहद पतली परत में सोने की कोटिंग होती है. यह कोटिंग बेहतर कनेक्टिविटी और करंट फ्लो के लिए की जाती है. यह मात्रा इतनी कम होती है कि इसे निकालना ही मुमकिन नहीं है. ऐसे में कमाई तो दूर की कौड़ी है.

चीन के जिस व्यक्ति की चर्चा हो रही है, उसने यह सोना किसी एक या कुछ सिम कार्ड से नहीं निकाला. उसने बड़ी मात्रा में पुराने सिम कार्ड, मोबाइल पार्ट्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इकट्ठा किया. इसके बाद खास केमिकल प्रोसेस के जरिए धातुएं अलग की गईं. इसी प्रक्रिया में करीब 191 ग्राम शुद्ध सोना निकलने की बात कही गई है, जिसकी कीमत लगभग 26 लाख रुपये के आसपास बताई जा रही है.

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यहां एक और बात पर गौर किया जाना चाहिए कि ये पूरी खबर चीनी व्यक्ति के सोशल मीडिया पर किए दावे पर आधारित है.  किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्था या आधिकारिक जांच एजेंसी ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि निकाला गया सोना वास्तव में उसी मात्रा में और उसी तरीके से प्राप्त हुआ है, जैसा उस चीनी व्यक्ति ने बताया है.

कानूनी अनुमति की जरूरत

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह की रिफाइनिंग प्रक्रिया बेहद जटिल और खतरनाक होती है. इसमें तेज केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, जो गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं. यही वजह है कि इसे घर पर आजमाना सुरक्षित नहीं माना जाता और कई देशों में इसके लिए कानूनी अनुमति भी जरूरी होती है.

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इस पूरी कहानी से एक बात साफ होती है. आपके फोन का सिम कार्ड सोने से बना हुआ नहीं होता. हां, उसमें सोने की बहुत मामूली मात्रा जरूर हो सकती है, लेकिन उससे सीधे पैसा कमाना आम लोगों के लिए संभव नहीं है.

यह खबर ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे की बढ़ती अहमियत की ओर भी इशारा करती है. सही तरीके से रीसाइक्लिंग की जाए तो पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से कीमती धातुएं वापस निकाली जा सकती हैं. लेकिन यह काम केवल प्रशिक्षित और अधिकृत प्रोसेसिंग यूनिट्स में ही किया जाना चाहिए. यानी अगली बार अगर कोई कहे कि सिम कार्ड में खजाना छुपा है, तो समझ जाइए कि सच्चाई इससे कहीं ज्यादा तकनीकी और जटिल है. 

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