पीले रंग के बोर्ड पर ही क्यों लिखा होता है रेलवे स्टेशन का नाम? ये होती है वजह

रेलवे स्टेशन पर पीले रंग के बोर्ड यूं ही नहीं लगाए जाते. ये रंग यात्रियों की सुविधा, सेफ्टी और साफ विजिबिलिटी के लिए चुना गया है, ताकि स्टेशन का नाम दूर से और हर मौसम में आसानी से दिख सके.

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ब्रिटिश दौर में रेलवे ने पीले रंग को स्टैंडर्ड बनाया था. उस समय भी यही माना गया था कि पीला रंग सबसे ज्यादा नजर आता है.

Railway Station Name Board: रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही सबसे पहले नजर जिस चीज पर जाती है, वो है स्टेशन का नाम लिखा हुआ बोर्ड. लगभग हर स्टेशन पर ये बोर्ड पीले रंग का ही होता है और उस पर काले रंग से स्टेशन का नाम लिखा होता है. कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर रेलवे ने पीला रंग ही क्यों चुना. क्या इसके पीछे कोई नियम है या फिर ये सिर्फ परंपरा है. असल में रेलवे स्टेशन के नाम वाले बोर्ड का रंग यूं ही तय नहीं किया गया. इसके पीछे यात्रियों की सुविधा, सेफ्टी और साइंस तीनों का खास रोल है. रेलवे हर दिन लाखों यात्रियों को संभालता है, ऐसे में छोटी सी जानकारी भी बहुत मायने रखती है. इसी वजह से बोर्ड के रंग से लेकर अक्षरों के साइज तक सब कुछ सोच-समझकर तय किया गया है.

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यात्रियों की आसानी के लिए रंग का चुनाव - Reason Behind Color Choice

पीला रंग दूर से जल्दी दिखाई देता है. चाहे धूप हो, कोहरा हो या रात का अंधेरा, पीला रंग आंखों को तुरंत कैच करता है. ट्रेन जब तेज रफ्तार में प्लेटफॉर्म से गुजरती है, तब भी यात्री स्टेशन का नाम आसानी से पढ़ पाते हैं. काले अक्षर और पीली बैकग्राउंड का कॉन्ट्रास्ट बहुत साफ होता है, जिससे पढ़ने में दिक्कत नहीं होती.

कोहरे और रात में भी साफ दिखता है बोर्ड - Visibility In Fog And Night

भारत में कई इलाकों में सर्दियों में घना कोहरा रहता है. ऐसे मौसम में सफेद या हल्के रंग धुंध में घुल जाते हैं. पीला रंग कोहरे में भी उभरकर दिखता है. यही वजह है कि लोको पायलट और गार्ड को स्टेशन पहचानने में आसानी होती है. रात में भी स्टेशन की लाइट में पीला बोर्ड ज्यादा साफ नजर आता है.

सेफ्टी और ऑपरेशन में मददगार - Safety And Railway Operations

रेलवे सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि स्टाफ के लिए भी काम करता है. स्टेशन बोर्ड का साफ दिखना ड्राइवर के लिए बहुत जरूरी होता है. इससे ट्रेन की ब्रेकिंग, स्टॉप और सिग्नल से जुड़ी जानकारी सही समय पर मिलती है. गलत रंग होने पर स्टेशन पहचानने में देरी हो सकती है, जो सेफ्टी के लिहाज से ठीक नहीं है.

पुराने समय से चला आ रहा नियम - Traditional And Standard Practice

ब्रिटिश दौर में रेलवे ने पीले रंग को स्टैंडर्ड बनाया था. उस समय भी यही माना गया था कि पीला रंग सबसे ज्यादा नजर आता है. आज भी भारतीय रेलवे उसी स्टैंडर्ड को फॉलो करता है. इससे पूरे देश में एक जैसा सिस्टम बना रहता है और यात्रियों को कन्फ्यूजन नहीं होता.

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