- पाकिस्तान शब्द को पहली बार लिखित में भारत के मुसलमान चौधरी रहमत अली ने 1933 में इस्तेमाल किया था.
- पाकिस्तान नाम एक एक्रोनिम P A K S tan और फारसी और उर्दू के पवित्र भूमि के अर्थ पर आधारित है.
- इसी विचार ने अलग राष्ट्र पाकिस्तान के निर्माण की भूमिका निभाई, हालांकि उसका राजनीतिक असर बढ़ने में वक्त लगा.
पाकिस्तान एक देश है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह नाम अचानक ही नहीं आया- इसके पीछे राजनीति, छात्रों की बहस और लंदन की सड़कों तक की कहानी जुड़ी है. पाकिस्तान वही नाम है जिसने आगे चलकर भारत में बंटवारे और दो राष्ट्र के सिद्धांत को जन्म दिया. एक भारतीय मुसलमान चौधरी रहमत अली इंग्लैंड के कैम्बिज में रह कर कानून की पढ़ाई कर रहे थे. यह वही संस्थान है जहां से प्रख्यात कवि अल्लामा इकबाल भी पढ़ते थे.
बात 28 जनवरी 1933 की है, तब चौधरी रहमत अली ने अपने दिमाग में कौंधे एक विचार को एक पर्चे पर उतार कर सार्वजनिक किया था. उन्होंने पर्चे पर लिखा था कि मुसलमानों के लिए अलग देश चाहिए और उसका नाम होगा Pakstan. उन्होंने खुद इसका जिक्र अपनी किताब पाकिस्तानः द फादरलैंड ऑफ द पाक नेशन में किया है.
इतिहासकार क्या कहते हैं?
इतिहासकार केके अजीज के मुताबिक यह घटना 1932 के आसपास की है और उनके मुताबिक रहमत अली ने तब के भारत के उत्तरी हिस्से से पाकिस्तान बनाने की संकल्पना जाहिर की थी.
वहीं इतिहासकार स्टीफन फिलिप कोहेन द आइडिया ऑफ पाकिस्तान में लिखते हैं, "जहां तक एक अलग भारतीय मुस्लिम राजनीतिक राष्ट्र के विचार की बात है, इसे सबसे पहले 1930 के दशक में इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में रहने वाले एक भारतीय मुसलमान चौधरी रहमत अली ने पेश किया था."
मोहम्मद अली जिन्ना
Photo Credit: AFP
द आइडिया ऑफ पाकिस्तान में इसकी तस्दीक करते हुए स्टीफन फिलिप कोहेन लिखते हैं "उन्होंने भारतीय छात्रों के एक ग्रुप के साथ दस मुस्लिम राज्यों के एक फेडरेशन की योजना बनाई, जिसे उन्होंने उन प्रांतों के अक्षरों को मिलाकर पाकिस्तान नाम दिया, जहां मुस्लिम बहुमत में थे या उसके करीब थे: पंजाब, अफगानिस्तान, कश्मीर और बलूचिस्तान. फारसी में, पाकिस्तान का मतलब 'पवित्र लोगों की भूमि' भी है."
एक संदर्भ यह भी है कि 1930 में चौधरी रहमत अली इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में रहते थे. उस दौरान वो लंदन की एक डबल डेकर बस की ऊपरी सीट पर बैठे थे, तभी अचानक उनके दिमाग में एक शब्द चमका जो Pakstan था. एक और किस्सा ये है कि रहमत अली ने यह नाम पहली बार अपने दोस्तों से लंदन में थेम्स नदी के किनारे टहलते हुए शेयर किया था.
हालांकि इतिहासकार अकील अब्बास जाफरी के मुताबिक, 1 जुलाई 1928 को पहली बार पाकिस्तान शब्द कागज पर आया, तब कश्मीर के पत्रकार गुलाम हसन शाह काजमी ने एबटाबाद में पाकिस्तान नाम से अखबार निकालने की इजाजत मांगी.
चौधरी रहमत अली की किताब 'द फादरलैंड ऑफ दे पाक नेशन'
Photo Credit: Foister and Jagg, Cambridge, Great Britain
पाकिस्तान शब्द के मायने क्या हैं?
इतिहासकार स्टीफन फिलिप कोहेन लिखते हैं, "चौधरी रहमत अली नाम के एक मुस्लिम छात्र ने पहली बार लिखित रूप में ‘पाकिस्तान' शब्द का प्रयोग किया. यह नाम उन्होंने Now or Never: Are we to live or perish forever? नाम के एक बुकलेट में इस्तेमाल किया."
चौधरी रहमत अली ब्रिटिश इंडिया के पंजाब से थे. वे तब कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई कर रहे थे. उन्होंने Pakistan नाम खुद तैयार किया, यह शब्द दो तरह से अर्थ रखता है. इसका फारसी और उर्दू दोनों में अर्थ पवित्र या शुद्ध होता है. हालांकि दूसरी तरह से इसे एक एक्रोनीम के रूप में भी देखा जाता है, जिसमें कुछ क्षेत्रों के नामों के शुरुआती अक्षर को जोड़ा गया है.
P- पंजाब
A- अफगानिया (पहले नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविन्स और अब खैबर पख्तूनख्वाह)
K- कश्मीर
S- सिंध
tan- बलूचिस्तान
जब इन सभी अक्षरों को मिलाया गया तो यह शब्द बना PAK-S-tan यानी शुद्ध या पवित्र भूमि. बाद में उच्चारण आसान करने के लिए इसमें i जोड़ दिया गया और बन गया- Pakistan.
Photo Credit: The_Brookings_Institution
बुकलेट में क्या लिखा गया था?
उस बुकलेट में रहमत अली ने लिखा कि यह क्षेत्र जहां मुसलमानों की संख्या अधिक है- उसे एक अलग राष्ट्रीय पहचान और संविधान मिलना चाहिए. उन्होंने ब्रिटिश भारत को एक ही राष्ट्र मानने की जगह अलग-अलग राष्ट्रों का समूह बताया और मुसलमानों के लिए एक अलग सामराज्य की प्रस्ताव रखा.
वो शब्द जिसने उपमहाद्वीप के इतिहास पर अपनी छाप छोड़ी
आज पाकिस्तान सिर्फ एक देश का नाम नहीं है. यह भारत के बंटवारे की कहानी है. यह लाखों लोगों की उजड़ी जिंदगी, पलायन, मौतें और दक्षिण एशिया की बदली तस्वीर की कहानी भी है. और यह सब शुरू हुआ था एक ऐसे विचार से जिसे शुरू शुरू में कोई पहचान नहीं मिली. जी हां, रहमत अली जिन्ना के मुखर आलोचक थे.
इतिहासकार स्टीफन फिलिप कोहेन के मुताबिक, "शायद यही वजह थी कि उस दौरान उनके 1930 के दशक में लिखे गए 'पाकिस्तान' के विचार को अक्सर काल्पनिक इतिहास के रूप में पेश किया गया."
स्टीफन फिलिप कोहेन ने यह भी लिखा कि, "पाकिस्तान नाम 1945 तक आम इस्तेमाल में नहीं आया. यहां तक कि मुस्लिम लीग के 1940 के प्रस्ताव में भी, जिसमें भारत के मुसलमानों के लिए एक अलग राज्य की मांग की गई थी, इसका जिक्र नहीं था."
Photo Credit: AFP
दरअसल रहमत अली, जिन्ना की आलोचना इसलिए करते थे कि वो पाकिस्तान का गठन केवल पूर्वी बंगाल, सिंध, बलूचिस्तान और पश्चिमी बंगाल को मिलाकर करना चाहते थे.
इतिहासकार स्टीफन फिलिप कोहेन लिखते हैं, "1940 के दशक तक रहमत अली, जिन्ना की इस बात के लिए कड़ी आलोचना कर रहे थे कि वह ऐसा पाकिस्तान चाहते थे जिसमें सिर्फ पूर्वी बंगाल, सिंध, बलूचिस्तान और पश्चिमी बंगाल शामिल हों."
इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख के मुताबिक तब मोहम्मद अली जिन्ना जैसे अन्य नेताओं ने शुरू-शुरू में उनके इस विचार पर अधिक ध्यान नहीं दिया. पर 1940 के दशक के अंत में यह नाम और विचार मुसलमानों के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ.
आखिर अंग्रेजों ने जब 1947 में भारत का विभाजन कर दिया तब यही नाम पाकिस्तान के आधिकारिक नाम में तब्दील हो गया और पाकिस्तान अस्तित्व में आया.













