Hantavirus Meaning: कोरोना वायरस के बाद अब दुनिया में एक नए वायरस की खूब चर्चा हो रही है, जिसका नाम हंता वायरस है. एमवी होंडियस नाम के समुद्री जहाज में फैले इस खतरनाक वायरस ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है. इस जहाज में सवार पांच लोगों में वायरस फैला है, वहीं कुछ लोगों को संदिग्ध वाली लिस्ट में रखा गया है. इनमें एक डच कपल समेत तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है. ऐसे में अब ट्रैक किया जा रहा है कि इस जहाज में सवार लोग किन देशों में पहुंचे हैं, जिन्होंने वायरस का पता चलने से पहले ही शिप छोड़ दिया था. इसी बीच लोग अब हंता वायरस को लेकर गूगल पर तमाम चीजें सर्च कर रहे हैं, ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि हंता का मतलब क्या होता है और कैसे ये नाम रखा गया.
क्या होता है हंता का मतलब?
हंता वायरस का नाम सुनने में ही काफी खतरनाक लगता है. हंता वायरस (Hantavirus) का नाम दक्षिण कोरिया की हंतान नदी (Hantan River) के नाम पर रखा गया है. इस वायरस को सबसे पहले 1978 में धारीदार जंगली चूहों में देखा गया था, ये चूहे इसी हंतान नदी के पास मिले थे. इस वायरस का संबंध कोरियाई युद्ध से भी जुड़ा है. 1951-1953 के कोरियाई युद्ध के दौरान यूएन के तीन हजार से ज्यादा सैनिक अचानक बीमार हो गए, जिसके बाद वैज्ञानिक इस बीमारी की जांच में जुट गए. आखिरकार इस खतरनाक हंता वायरस की खोज हुई.
शुरुआत में इसे हंतान वायरस कहा जाता था. किसी एक वायरस नहीं, बल्कि एक जैसे दिखने वाले कई वायरसों की फैमिली को इस नाम से जाना जाता है. उत्तरी अमेरिका में पाया गया 'सिन नोम्ब्रे वायरस' (Sin Nombre virus) भी इसी का एक हिस्सा है.
कितना खतरनाक है हंता वायरस?
हंता वायरस आमतौर पर कुतरने वाले जानवरों या जीवों से फैलता है. जिनमें चूहा, गिलहरी और बाकी जीव शामिल हैं. इनके मल, मूत्र या फिर लार से ये वायरस फैल सकता है. इंसानों में ये तेजी से फैलता है और एक इंसान से दूसरे इंसान में सांस के जरिए भी फैल सकता है. साल 2018 में अर्जेंटीना में एक शख्स ने 34 लोगों में ये वायरस फैला दिया था, जिनमें 11 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि एक्सपर्ट्स इसे कोरोना वायरस जितना घातक मानने से इनकार कर रहे हैं, क्योंकि ये कई घंटे या कई दिनों तक संक्रमित व्यक्ति के साथ वक्त बिताने से फैलता है.
वायरस फैलने के बाद क्या होता है?
हंता वायरस से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा इससे किडनी भी फेल हो सकती है, साथ ही इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा भी रहता है. इसके दूसरे लक्षणों की बात करें तो संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, थकान, कंपकंपी और मसल्स पेन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
ये भी पढ़ें- SR बोम्मई केस क्या है, तमिलनाडु में बहुमत की रेस के बीच कमल हासन ने किया जिसका जिक्र














