Flying Fox Death: सोचिए, तेज गर्मी के बीच अचानक पेड़ों से चमगादड़ नीचे गिरने लगें. कुछ जमीन पर तड़प रहे हों, कुछ उड़ते-उड़ते बेहोश होकर गिर जाएं. ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों कुछ ऐसा ही डरावना नजारा देखने को मिलता है. यहां बढ़ती गर्मी और हीटवेव की वजह से हजारों फ्लाइंग फॉक्स यानी बड़े चमगादड़ों की मौत हो जाती है. हालात इतने खराब हैं कि वन्यजीव बचाने वाले वॉलंटियर्स को लगातार रेस्क्यू करना पड़ता है. खास बात ये है कि कई बार हीट वेव इतनी गर्म हो जाती है कि चमगादड़ अपने शरीर का तापमान संभाल ही नहीं पाते और कुछ ही मिनटों में दम तोड़ देते हैं.
आखिर क्यों गिरने लगते हैं चमगादड़?
विशेषज्ञों के मुताबिक फ्लाइंग फॉक्स प्रजाति के चमगादड़ ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पाते. जब टेंप्रेचर 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचता है. तो उनके शरीर पर दबाव बढ़ने लगता है. वो खुद को ठंडा रखने के लिए पंख फड़फड़ाते हैं और तेजी से सांस लेते हैं. लेकिन लगातार गर्मी में ये तरीका भी काम नहीं करता. इसके बाद कई चमगादड़ पेड़ों से नीचे गिरने लगते हैं. कुछ की तुरंत मौत हो जाती है. जबकि कई घंटों तक तड़पते रहते हैं.
ऑस्ट्रेलिया में पहले भी हो चुकी है बड़ी तबाही
ऑस्ट्रेलिया में ऐसा कई बार हो चुका है. साल 2018 में क्वींसलैंड के कैर्न्स इलाके में भीषण गर्मी के दौरान करीब 23 हजार चमगादड़ों की मौत हो गई थी. इसे देश के सबसे बड़े वन्यजीव नुकसान में गिना जाता है. अब 2026 में विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स जैसे इलाकों में फिर हजारों चमगादड़ों के मरने की खबरें सामने आई हैं. कई जगह पेड़ों के नीचे मरे हुए चमगादड़ों के ढेर भी मिले हैं.
क्लाइमेट चेंज बना सबसे बड़ा खतरा
ऑस्ट्रेलिया के वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव अब पहले से ज्यादा खतरनाक और लंबी हो रही हैं. इसका सीधा असर जानवरों पर पड़ रहा है. चमगादड़ पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी होते हैं क्योंकि वो पेड़ों के बीज फैलाने और जंगलों को बचाने में मदद करते हैं. इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया में अब सरकार से मांग की जा रही है कि गर्मी के दौरान फ्लाइंग फॉक्स कॉलोनियों के लिए इमरजेंसी प्लान, पानी और कूलिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं तैयार की जाएं, ताकि हजारों जानवरों की जान बचाई जा सके.
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