जापान से एक ऐसी खबर सामने आई है जो टेक्नोलॉजी और ह्यूमन इमोशंस का दिलचस्प कॉम्बिनेशन दिखाती है. तेजी से बदलती दुनिया में जहां मशीनें इंसानों का काम आसान कर रही हैं, वहीं अब वे अकेलेपन को भी कम करने की कोशिश में जुट गई हैं. खासकर बुजुर्गों के लिए एक ऐसा रोबोट तैयार किया गया है जो उनसे बात करेगा, उन्हें सुनेगा और मानसिक सहारा देने की कोशिश करेगा. बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन एक बड़ी परेशानी बन जाता है और ऐसे में ये नई तकनीक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है.
बुजुर्गों की देखभाल में नई तकनीक की एंट्री
उम्रदराज लोगों की देखभाल करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी होती है. जापान जैसे देशों में ये चुनौती और भी बड़ी है क्योंकि वहां युवाओं की संख्या कम होती जा रही है और बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उनकी देखभाल के लिए लोगों की कमी साफ महसूस होती है. ऐसे हालात में जापान तकनीक के सहारे समाधान खोज रहा है.
क्योटो यूनिवर्सिटी का खास रोबोटिक सिस्टम
जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बुजुर्गों की मदद के लिए एक खास रोबोटिक सिस्टम तैयार किया है. इस रोबोट का नाम बुद्धराइड रखा गया है. नाम से ही साफ है कि इसका कनेक्शन आध्यात्मिक सोच से जुड़ा है. इसे बौद्ध धर्म की सीख और सोच से इंस्पायर होकर डिजाइन किया गया है.
बौद्ध सोच से इंस्पायर बातचीत
रोबोट को ऐसी बातों से ट्रेन किया गया है जो मन को शांत रखने और पॉजिटिविटी को बढ़ावा देती हैं. इसमें हिंसा से दूर रहने, धैर्य रखने और जीवन को संतुलित नजरिये से देखने जैसी सीख शामिल है. इसका मकसद बुजुर्गों से शांत और सुकून भरे तरीके से बातचीत करना है. जो लोग अकेले रहते हैं, उनके लिए ये एक अच्छा साथी बन सकता है.
झिझक वाले सवालों के जवाब भी
कई बार बुजुर्ग ऐसे सवाल पूछना चाहते हैं जिन्हें वे किसी से पूछने में हिचकिचाते हैं. इस रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये संवेदनशील सवालों का भी शांत और समझदारी से जवाब दे सके. इससे बुजुर्ग खुलकर बात कर सकते हैं.
रोबोट को लेकर बहस जारी
हालांकि इस तरह की तकनीक पर बहस भी हो रही है. कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मशीनें मददगार हो सकती हैं लेकिन इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं ले सकतीं. वहीं कई लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसे सिस्टम की जरूरत और बढ़ेगी क्योंकि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और संसाधन सीमित होते जा रहे हैं.














