ताइवानी लेखिका यांग शुआंग-जी और ट्रांसलेटर लिन किंग ने "ताइवान ट्रैवलॉग" के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज़ जीता है. यह पुरस्कार लंदन की टेट मॉडर्न गैलरी में एक समारोह में दिया गया. बता दें कि इस पुरस्कार से दुनियाभर के उन काल्पनिक उपन्यासों को सम्मानित किया जाता है, जिनका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया हो. 'ताइवान ट्रैवलॉग' मैंडरिन चीनी से अनुवादित पहली ऐसी किताब है. जिसने यह पुरस्कार जीता है. 1984 में जन्मी यांग इस पुरस्कार की पहली ताइवानी विजेता हैं. इसकी लेखिका ताइवान की यांग शुआंग-ज़ी (Yáng Shuāng-zǐ) हैं. इसका अंग्रेजी अनुवाद ताइवानी-अमेरिकी अनुवादक लिन किंग (Lin King) ने किया है.
क्या है अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार
- अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की शुरुआत 2005 में हुई थी.
- 2005 में सबसे पहले ये इनाम दिया था गया था. Ismail Kadare (Albania) ने पहला अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता था.
- ये पुरस्कार केवल उन्हीं किताबों को दिया जाता है जो किसी भी भाषा में लिखी गई हो. लेकिन उसका अंग्रेजी अनुवाद हुआ हो. साथ ही यूके (UK) या आयरलैंड में प्रकाशित हुई हो.
- अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार हर दो वर्ष में एक बार प्रदान किया जाता है.
- इनाम के तौर पर कुल 50,000 पाउंड (65 लाख रुपये) दिया जाता है. ये राशि किताब की लिखेक और ट्रांसलेटर के बीच आधी-आधी बांटी जाती है.
क्या है किताब की कहानी
इस किताब की कहानी 1930 के दशक के ताइवान पर आधारित है, जब वहां जापानी औपनिवेशिक शासन (Japanese Colonial Rule) था. इस किताब में दो महिलाओं की लव स्टोरी है. इस उपन्यास में ताइवान के स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का भी काफी अच्छे से उल्लेख किया गया है. यह किताब सबसे पहले 2020 में मैंडरिन भाषा में प्रकाशित हुई थी और इसे ताइवान का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान, 'गोल्डन ट्रिपॉड अवॉर्ड' मिला था. ताइवानी लेखिका यांग शुआंग-जी ने कहा अपने इस उपन्यास पर बात करते हुए कि कि इसका मुख्य विषय यात्रा और भोजन. इसने मेरी जिंदगी को दो साफ तरीकों से बदल दिया. मेरी बचत कम हो गई और मेरा वज़न बढ़ गया.













