ततैया सिर्फ 10 मिमी का होता है, लेकिन अगर ये डंक मार दे, तो जान पर बन आती है. ततैया का नाम सुनते ही मन में उसके डंक का खौफ पैदा होने लगता है. इसके डंक मारने से तेज दर्द होने लगता है, जिसके कारण सूजन, सांस लेने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर कम होने की स्थिति में जान जाने का खतरा भी होता है. ततैया एक ऐसा कीट है, जो दुनिया भर में पाया जाता है और अपनी विशिष्ट आदतों, रंगों और व्यवहार के लिए जाना जाता है. यह मधुमक्खी और भौंरे की तरह दिखता है, लेकिन इनसे बिल्कुल अलग होता है. ततैया का शरीर पतला, चमकीले रंगों वाला और अक्सर पीले-काले धारियों वाला होता है. इसकी लंबाई प्रजाति के अनुसार 10 मिमी से लेकर 40 मिमी तक हो सकती है.
ततैया की दुनियाभर में हजारों प्रजातियां हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो वर्गों में बांटा जाता है. सामूहिक ततैया (Social Wasps) जो समूह में रहती हैं और घोंसला बनाती हैं. इनमें पीली ततैया (Yellowjacket), पेपर ततैया (Paper Wasp) और हॉर्नेट प्रमुख हैं. दूसरी है, एकाकी ततैया (Solitary Wasps) ये अकेले रहती हैं और अपने शिकार को डंक मारकर लकवाग्रस्त कर देती हैं. इनमें मड डॉबर और सिसाडा किलर जैसी प्रजातियां आती हैं.
दुनिया में कहां पाए जाते हैं सबसे ज्यादा ततैया
ततैया लगभग पूरी दुनिया में पाए जाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा ये न्यूजीलैंड में होते हैं. न्यूज़ीलैंड में जर्मन ततैया और सामान्य ततैया ज्यादा पाए जाते हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि यहां इनके प्राकृतिक शिकारी नहीं हैं. हल्की सर्दियां और पर्याप्त भोजन (जैसे शहद, कीट) इनके लिए आदर्श वातावरण बनाते हैं. दक्षिण द्वीप के बीच फॉरेंस्ट में तो इनका बायोमास (कुल वजन) पक्षियों और स्तनधारियों से भी ज्यादा पाया गया है. न्यूजीलैंड के अलावा ततैया यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान में भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.
कैसे-कैसे ततैया
- पेपर वेस्प: यह सबसे आम प्रकार का ततैया है, जो पेपर जैसी सामग्री से अपना घोंसला बनाता है.
- येलोजैकेट: यह ततैया अपने पीले और काले रंग के लिए जाना जाता है.
- हॉर्नेट: यह एक बड़ा और आक्रामक प्रकार का ततैया है, जो अपने शिकार को मारने के लिए अपने डंक का उपयोग करता है.
- मर्डर हॉर्नेट: यह ततैया अपने शिकार को मारने के लिए अपने डंक का उपयोग करता है और इसका जहर बहुत जहरीला होता है.
- बाल्ड-फेस हॉर्नेट: यह ततैया अपने सफेद और पीले रंग के लिए जाना जाता है.
- यूरोपियन हॉर्नेट: यह ततैया यूरोप में पाया जाता है और अपने शिकार को मारने के लिए अपने डंक का उपयोग करता है.
- एशियन जायंट हॉर्नेट: यह ततैया एशिया में पाया जाता है.
सर्दियों में मर जाती हैं ज्यादातर ततैया
ततैया का जीवन चक्र चार चरणों में पूरा होता है, अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क. रानी ततैया वसंत ऋतु में सक्रिय होती है और घोंसला बनाकर अंडे देती है. गर्मियों में इनकी संख्या बढ़ती जाती है और अन्य ततैया भोजन जुटाने का काम करती हैं. सर्दियों में अधिकांश ततैया मर जाती हैं, केवल रानी जीवित रहती है. ततैया पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. ये कई हानिकारक कीटों का शिकार करती हैं, जिससे फसलों को बचाने में मदद मिलती है. कुछ प्रजातियां परागण भी करती हैं. हालांकि, इनका आक्रामक स्वभाव और दर्दनाक डंक इन्हें मनुष्यों के लिए खतरनाक बना देता है.
ततैया का डंक जहरीला होता है और कई बार एलर्जी या गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है. इसलिए इनके घोंसले से दूर रहना चाहिए. अगर डंक लग जाए तो प्रभावित स्थान को ठंडे पानी से धोकर बर्फ लगाना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है.
बेहद जहरीला होता है ततैया का जहर
ततैया के जहर में प्रोटीन और टॉक्सिन्स होते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और एलर्जिक प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकते हैं. मधुमक्खी के विपरीत, ततैया कई बार डंक मार सकती है, जिससे खतरा बढ़ जाता है. डंक मारने के बाद तेज दर्द और सूजन होता है, उस जगह जलन का अहसास होने लगता है. इसके बाद सांस लेने में मुश्किल होती है. चक्कर या बेहोशी और ब्लड प्रेशर भी गिरने लगता है. यह स्थिति जानलेवा हो सकती है.














