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कौन हैं IPS विद्या सागर मिश्र, जिनके ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोने लगा पूरा पुलिस महकमा

IPS Vidya Sagar Mishra: IPS विद्या सागर मिश्र यूपी पुलिस के तेज तर्रार अधिकारियों में शामिल हैं. उनके व्यवहार और पुलिसिंग को लेकर उनकी काफी चर्चा होती रहती है.

कौन हैं IPS विद्या सागर मिश्र, जिनके ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोने लगा पूरा पुलिस महकमा
IPS Vidya Sagar Mishra

IPS Vidya Sagar Mishra: उत्तर प्रदेश के रामपुर में बड़ा फेरबदल हुआ है. यहां 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी सोमेंद्र मीणा को नए एसपी के तौर पर नियुक्त किया गया है. इसी बीच एसपी विद्या सागर मिश्र का ट्रांसफर सीतापुर में सेनानायक 11वीं वाहिनी पीएसी के पद पर हुआ है. इसी बीच रामपुर में कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने सभी की आंखों को नम कर दिया. एसपी विद्या सागर मिश्र के फेयरवेल पर वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मी फूट फूटकर रोने लगीं. इस दौरान पुलिस अधिकारी विद्या सागर मिश्र सभी को चुप कराते नजर आए. ऐसे में आइए जानते हैं कि आईपीएस विद्या सागर मिश्र कौन हैं और क्यों उनके जाने का पुलिस महकमे में इतना असर दिख रहा है. 

कौन हैं IPS विद्या सागर मिश्र?

यूपी के बलिया जिले के एक छोटे से गांव से आने वाले विद्या सागर मिश्र के पिता कोलकाता पुलिस में कॉन्स्टेबल थे. कम संसाधनों के बावजूद विद्या सागर मिश्र ने सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की. पूर्व माध्यमिक विद्यालय बांसटे से उनकी पढ़ाई की शुरुआत हुई और इसके बाद वो अपने पिता के साथ कोलकाता चले गए. यहां उन्होंने 8वीं के बाद की पढ़ाई पूरी की. 1983 में पश्चिम बंगाल बोर्ड से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी के सिटी कॉलेज में दाखिला लिया और यहां से Bsc की. 

पिता को वर्दी में देखकर विद्या सागर मिश्र की दिलचस्पी भी पुलिस में हुई और उन्होंने तय कर लिया कि वो आईपीएस बनेंगे. कोलकाता से निकलने के बाद उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई की. इसके बाद दो सरकारी नौकरी भी लगीं, लेकिन इन्हें ठुकराकर उन्होंने अपना सपना पूरा किया. 1993 में पीपीएस में चयन हुआ और इसके बाद 2015 में प्रमोट होकर IPS बन गए. पुलिस अधिकारी बनने के बाद उन्होंने यूपी के कई बड़े जिलों में सेवा दी और शानदार काम किया. 

समझौता नहीं करने वाले अफसर

IPS विद्या सागर मिश्र यूपी पुलिस फोर्स के उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने कभी किसी चीज से समझौता नहीं किया. कहा जाता है कि आज भी उनका नाम सुनकर अपराधी कांपते हैं. उनके नाम 45 से ज्यादा एनकाउंटर दर्ज हैं. अपने साथियों और आम लोगों के लिए उनका व्यवहार काफी सरल है, अपने जूनियर पुलिसकर्मियों को वो एक परिवार की तरह मानते हैं. यही वजह है कि अब उनके ट्रांसफर पर हर कोई भावुक है. 

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