कौन थे रामदास सोरेन, उनका जाना हेमंत सोरेन के लिए कितना बड़ा झटका, पद से कद तक, जानें सबकुछ

रामदास सोरेन का निधन जेएमएम के लिए ये दोहरा झटका है. हाल ही में पार्टी ने शिबू सोरेन को खोया था. अब रामदास सोरेन का जाना बहुत बड़ी क्षति है. वह पार्टी के लिए कितने खास थे इसका अंदाजा उनके पद और कामकाज को देखकर लगा पाना मुश्किल नहीं है. 

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झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन.
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  • झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का बाथरूम में गिरने से गंभीर चोट लगने के बाद इलाज के दौरान निधन हो गया.
  • रामदास सोरेन आदिवासी अधिकारों के बड़े पैरोकार और जेएमएम में कोल्हान क्षेत्र के प्रमुख नेता थे.
  • उन्होंने घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जाने के बाद साल 2024 में मंत्री पद ग्रहण किया था.
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रामदास सोरेन... झारखंड के शिक्षा मंत्री और आदिवासी अधिकारों के बड़े पैरोकार, उनका जाना जेएमएम के लिए किसी बड़े नुकसान (Ramdas Soren Death) से कम नहीं है. झारखंड ने एक बड़ा नेता खो दिया है. शुक्रवार शाम उनके निधन की खबर सामने आते ही पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई. जेएमएम के लिए ये दोहरा झटका है. हालही में पार्टी ने शिबू सोरेन को खोया था. अब रामदास सोरेन का जाना बहुत बड़ी क्षति है. वह पार्टी के लिए कितने खास थे इसका अंदाजा उनके पद और कामकाज को देखकर लगा पाना मुश्किल नहीं है. 

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रामदास सोरेन का कद समझिए

झारखंड के शिक्षामंत्री रामदास सोरेन की गिनती हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में होती थी. कोल्हान में पार्टी के लिए उनका का कद बहुत ही बड़ा था. चंपई सोरेन के बाद वह दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते थे. आदिवासी समाज के बीच उनकी एक अलग ही पहचान थी. 62 साल के रामदास सोरेन को उनकी सादगी, जमीनी स्तर पर जुड़ाव और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा. वह आदिवासी अधिकारों के बड़े पैरोकार माने जाते थे. 

दो बार चुनकर विधानसभा पहुंचे 

रामदास सोरेन पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला से विधायक थे. वह सिंहभूम जिले के अध्यक्ष भी थे. उन्हें पूर्वी सिंहभूम से JMM का दूसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता था. पिछले साल झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले चंपई सोरेन के पार्टी छोड़ने के बाद उनको मंत्री पद मिला था. रामदास सोरेन घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुने जा चुके हैं. पहली बार वह 2009 में विधायक बने थे. साल 2019 में दूसरी बार जनता ने उनको यहां से जिताकर विधानसभा पहुंचाया.

रामदास सोरेन का राजनीतिक सफर

रामदास सोरेन के अगर राजनीतिक सफर की बात करें तो इसकी शुरुआत शिबू सोरेन के साथ आंदोलन के दौरान ही हुई थी. वह झारखंड की मांग को लेकर हुए आंदोलन में खूब सक्रिय रहे थे. झारखंड सरकार ने उन्हें 2024 में पहली बार मंत्री बनाया था.उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा घोराबंदा पंचायत के ग्राम प्रधान के रूप में शुरू की थी. देखते ही देखते वह हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में से एक बन गए.

  • रामदास सोरेन 1990 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की जमशेदपुर पूर्व इकाई के अध्यक्ष चुने गए.
  • बाद में वह घाटशिला चले गए और 2005 के विधानसभा चुनाव में वहां से किस्मत आजमाने की तैयारी करने लगे.
  • लेकिन यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई, जो झामुमो की गठबंधन सहयोगी थी.
  • फिर, उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए.
  • रामदास सोरेन ने 2009 का विधानसभा चुनाव घाटशिला से लड़ा और पहली बार झारखंड विधानसभा के सदस्य बने.
  • वह 2014 में बीजेपी के लक्ष्मण टुडू से घाटशिला में हार गए थे
  • लेकिन 2019 में उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए इस सीट पर फिर से कब्ज़ा कर लिया
  • उन्होंने 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बीजेपी प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को हराकर तीसरी बार यह सीट जीती.

रामदास सोरेन का निजी जीवन

रामदास सोरेन का जन्म 1 जनवरी 1963 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घोराबांधा गांव में हुआ था. वह एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे. 15 अगस्त 2015 को उनका बीमारी के चलते निधन हो गया.सोरेन का जन्म 1 जनवरी 1963 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घोराबांधा गांव में हुआ था. वह एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनकी पत्नी का नाम सुरजमनी सोरेन है. दोनों के चार बच्चे, दो बेटे और एक बेटी है. उन्होंने जमशेदपुर के कोपरेटिव कॉलेज से पढ़ाई की थी. वह ग्रेजुएट थे.

चंपई सोरेन के इस्तीफे के बाद बने थे मंत्री

चंपई सोरेन के मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद, रामदास सोरेन को 30 अगस्त को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गयाथा. हेमंत सोरेन सरकार में वह स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के मंत्री थे. उनका जाना सिर्फ पार्टी के लिए ही नहीं बल्कि झारखंड के पूरे आदिवासी समाज के लिए बड़ी क्षति है.

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दिल्ली में इलाज के दौरान निधन

दिल्ली के अपोलो अस्पताल में शुक्रवार रात उन्होंने आखिरी सांस ली. झामुमो नेता दो अगस्त को घर के  बाथरूम में गिरने के बाद से वेंटिलेटर पर थे. सीएम हेमंत सोरेन ने उनके निधन पर शोक जताते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "ऐसे छोड़कर नहीं जाना था रामदास दा... अंतिम जोहार दादा." पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी उनके निधन पर शोक जताया है. उनका पार्थिव शरीर शनिवार को रांची पहुंचा. आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. 

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