Ranchi News: झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के सामने 8 इनामी समेत कुल 27 नक्सलियों के आत्मसमर्पण (Jharkhand Naxals Surrender) करने के बाद अब इस पर सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) का बड़ा बयान सामने आया है. दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, 'हमारी सरकार की सोच पूरी तरह स्पष्ट है, जो हर व्यक्ति के विकास और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भागीदारी पर टिकी है. आज सरकार की आवाज हर गांव तक पहुंच रही है और इसी का नतीजा है कि भटके हुए लोग अब तेजी से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं.'
सामान्य जेल नहीं, अब 'ओपन जेल' में रहेगा परिवार
मुख्यमंत्री के इस बयान के बीच झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. सरकार की इस विशेष नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को आम अपराधियों की तरह सामान्य और बंद जेलों के भीतर नहीं ठूंसा जाएगा. इसके बजाय इन सभी लोगों को हजारीबाग स्थित ओपन जेल में शिफ्ट किया जा रहा है. इस ओपन जेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां उग्रवादियों को अपने परिवार के साथ रहने की पूरी आजादी मिलती है. इसके साथ ही जेल परिसर के भीतर ही उनके लिए विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि वे कोई न कोई हुनर सीखकर सम्मानजनक तरीके से रोजगार प्राप्त कर सकें.
मुख्यधारा में लौटने पर सरकार देगी 1.5 से 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता
सरकार की पुनर्वास नीति के अनुरूप मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों और कमांडरों को दोबारा जिंदगी शुरू करने के लिए मजबूत आर्थिक संबल भी दिया जा रहा है. नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उनके स्तर और ओहदे के हिसाब से 1.5 लाख रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक की तत्काल सहायता राशि और विशेष सरकारी अनुदान प्रदान किए जाते हैं. इस आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद इन लोगों को अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने में किसी भी तरह की आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े.
झारखंड में नक्सलवाद का काउंटडाउन शुरू, अब बचे सिर्फ 49 इनामी नक्सली
झारखंड में सुरक्षा बलों और पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे लगातार और कड़े अभियानों के कारण अब राज्य में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कड़े एक्शन के बाद अब पूरे झारखंड में केवल 49 इनामी नक्सली ही सक्रिय बचे हैं. एक समय था जब झारखंड के अधिकांश जिले वामपंथी उग्रवाद की चपेट में थे, लेकिन अब यह दायरा सिमटकर केवल लगभग एक-दो जिलों (मुख्य रूप से पश्चिम सिंहभूम) के दुर्गम इलाकों तक ही सीमित रह गया है. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी की बदौलत वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं है जब राज्य से उग्रवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा.
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