चंदा मांगकर लड़ा चुनाव और रच दिया इतिहास;हजारीबाग के नए मेयर अरविंद राणा को जानिए

Hazaribagh New Mayor Name: अअरविंद राणा की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने चुनावी खर्च के लिए किसी बड़े फंड या पूंजी का सहारा नहीं लिया, बल्कि आम लोगों से सहयोग राशि लेकर चुनावी मैदान में उतरे. मतदाताओं ने उन्हें ₹10 से लेकर ₹5,000 तक की राशि दी.

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  • हजारीबाग नगर निगम चुनाव में पत्रकार से राजनेता बने अरविंद राणा ने मेयर पद पर करीब 5000 वोटों से जीत हासिल की
  • अरविंद राणा ने चुनावी खर्च के लिए आम जनता से चंदा लेकर लगभग डेढ़ लाख रुपये का सहयोग प्राप्त किया था
  • उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए पोस्टर-बैनर छपवाए और मोटरसाइकिल का ईंधन भरवाने में चंदा राशि का उपयोग किया
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हजारीबाग:

हजारीबाग में नगर निगम चुनाव के परिणामों ने इस बार एक अनोखी मिसाल पेश की है. पत्रकार से राजनेता बने अरविंद राणा ने चंदा मांगकर चुनाव लड़ते हुए मेयर पद पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया. करीब 5 हजार वोटों से जीत दर्ज करते हुए उन्हें 23,500 मत प्राप्त हुए, जबकि दूसरे स्थान पर रहे सरफराज अहमद को 18,543 वोट मिले.

अरविंद राणा की जीत क्यों खास?

अरविंद राणा की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने चुनावी खर्च के लिए किसी बड़े फंड या पूंजी का सहारा नहीं लिया, बल्कि आम लोगों से सहयोग राशि लेकर चुनावी मैदान में उतरे. मतदाताओं ने उन्हें ₹10 से लेकर ₹5,000 तक की राशि दी. चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये का सहयोग मिला. इसी राशि से उन्होंने पोस्टर-बैनर छपवाए और अपनी मोटरसाइकिल का ईंधन भरवाया.

अरविंद राणा ने नामांकन के समय निर्वाचन विभाग को दी जानकारी में अपनी कुल संपत्ति मात्र ₹21,000 बताई थी. उनके पास न निजी वाहन है, न घर और न ही कोई बड़ी संपत्ति. इसके बावजूद उन्होंने जिस आत्मविश्वास और जनसमर्थन के साथ चुनाव लड़ा, वह हजारीबाग की राजनीति में नई दिशा का संकेत देता है.

जीत के बाद भावुक दिखे राणा 

जीत के बाद भावुक दिखे अरविंद राणा ने कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे हजारीबाग की जनता की है. “मैंने बिना पैसे के चुनाव लड़ा, लोगों ने तन-मन-धन से सहयोग दिया. अब उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना मेरी पहली जिम्मेदारी होगी,”. विजय जुलूस के दौरान उन्होंने ‘भारत माता की जय' के नारे के साथ समर्थकों का अभिवादन किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी उम्मीदवार ने खुले तौर पर जनता से चंदा मांगकर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. आमतौर पर चुनाव में धनबल हावी रहता है, लेकिन अरविंद राणा ने साबित कर दिया कि साफ सोच और जनविश्वास के दम पर भी सफलता पाई जा सकती है. अब सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की है. हजारीबाग की जनता को उम्मीद है कि चंदे से जीता उनका मेयर शहर के विकास और पारदर्शिता की नई मिसाल कायम करेगा.

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