प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत 3 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. पीएमएलए कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में विभाग के क्लर्क सह कैशियर संतोष कुमार, उनकी पत्नी ललिता सिन्हा और शेल कंपनी मेसर्स रॉकड्रिल कन्स्ट्रक्शन (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है. मामला रांची के स्वर्णरेखा हेड वर्क्स डिवीजन में सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और गबन से जुड़ा है.
जांच आगे बढ़ी, खुलने लगी परतें
एजेंसी ने अपनी जांच झारखंड पुलिस की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई अन्य आरोपियों पर शिकंजा कसता चलता गया. जांच में खुलासा हुआ कि कैशियर-सह-अपर डिवीजन क्लर्क के पद पर कार्यरत संतोष कुमार अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने से करीब 22.86 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की.
फर्जी अकाउंट बनाकर फंड ट्रांसफर का आरोप
चार्जशीट में बताया गया कि शुरुआती पुलिस जांच में गबन की राशि कम आंकी गई थी, लेकिन विस्तृत पड़ताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं. फर्जी नाम पर अकाउंट बनाकर बड़े पैमाने पर फंड का अवैध ट्रांसफर किया गया.
ईडी ने चार्जशीट में बताया है कि अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया गया. मुख्य आरोपी संतोष कुमार ने रांची के रातू इलाके में बहन के नाम पर जमीन खरीदी. इसके अलावा उसने पत्नी के नाम पर टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ी की बुकिंग कराई. जांच में 1.78 करोड़ रुपये से अधिक के आभूषण, 25 से ज्यादा म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश और कई फिक्स्ड डिपॉजिट का भी पता चला है.
26 ठिकानों पर ईडी ने मारा था छापा
इस मामले में ईडी ने 26 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से 55.08 लाख रुपये की अघोषित नकदी और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे. इससे पहले, एजेंसी इस मामले में आरोपियों की करीब 2.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है. ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं.
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