- झारखंड में अंश और अंशिका की गुमशुदगी की मामला बड़ी मशक्कत के बाद सुलझा
- रामगढ़ जिले को दो युवकों सचिन और डब्लू की समझदारी से दोनों बच्चे हुए बरामद
- देश की 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस बच्चों को खोजने में जुटी हुई थी
झारखंड पुलिस के लिए दो बच्चों की गुमशुदगी का मामला बेहद चुनौती बना हुआ था. अंश और अंशिका 2 जनवरी से लापता थे. देशभर के 17 हजार थानों की पुलिस इन बच्चों की लापता होने की खबर भेजी गई थी. बंगाल समेत 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अंश और अंशिका की तलाश के लिए कई छापेमारी चल रही थी. हर तरफ से मायूसी के बीच रामगढ़ के दो युवकों ने करिश्मा कर दिया. उनकी कोशिश के कारण ही अंश और अंशिका के माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई. दरअसल, दो स्थानीय युवकों सचिन और डब्लू की होशियारी ने अपहरण करने वालों दो लोगों को पुलिस के हत्थे चढ़ा दिया और दोनों बच्चों की सकुशल बरामदगी हो गई.
दो युवकों ने बच्चों को ढूंढ निकाला
जिन बच्चों को खोजना 17 हजार थानों और झारखंड राज्य की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था उन्हें दो स्थानीय युवकों ने अपनी सजगता की बदौलत हल कर दिया. रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना इलाके के रजरप्पा स्थित अहमद नगर में दो स्थानीय युवकों सचिन और डब्लू ने एक महिला और पुरुष के साथ दो मासमू बच्चों को देखा. उन्हें इन दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. दोनों अपना मोबाइल फोन निकाला और बच्चों की तस्वीर ले ली. इसके तुरंत बाद इन फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल लापता पोस्टर और बैनरों से मिलान करना शुरू किया. जैसे ही उन्हें कन्फर्म हुआ कि इन बच्चों का अपहरण किया गया है उन्होंने तुरंत इसकी सूचना रजरप्पा पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए 10 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंची. इसके बाद दोनों मासूम बच्चों अंश और अंशिका को सकुशल बरामद कर लिया गया. पुलिस ने बच्चों की बरामदगी के साथ एक महिला और पुरुष को भी हिरासत में लिया है. उन्हें गिरफ्तार करके पूछताछ के लिए रामगढ़ एसपी कार्यालय भेज दिया गया है.
झारखंड पुलिस ने बच्चों को सकुशल बरामद किया
अंतर्राज्यीय गिरोह का हो सकता है हाथ
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बच्चों को बरामद करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस पूरे प्रकरण में झारखंड के बाहर के लोग भी शामिल हो सकते हैं और जांच के दौरान अंतरराज्यीय गिरोह की संलिप्तता की आशंका भी सामने आई है. उन्होंने कहा कि अभी जांच जारी है. इसी वजह से अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि इसमें बच्चे किसी जान-पहचान वाले के संपर्क में थे या नहीं. लेकिन शुरुआती जांच में यह साफ हो रहा है कि यह मामला मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है और इसमें कई लोग शामिल हैं. पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा.
अपने माता-पिता की गोद में अंश और अंशिका
18 राज्यों की पुलिस ढूंढ रही थी, 4 लाख इनाम की घोषणा
गौरतलब है की बिहार, बंगाल समेत देश के 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अंश-अंशिका की तलाश के लिए कई राज्यों में एसआईटी की टीम ने छापेमारी की गई थी. देश की 17 हजार थानों की पुलिस इसकी सूचना भेजी गई थी. बचपन बचाओ आंदोलन और अन्य संगठनों के सदस्य देशभर के 439 जिलों में बच्चों की तलाश में जुटी थी. देश भर के सभी लीगल वॉलिंटियर्स को भी अंश-अंशिका का पता लगाने के लिए सक्रिय हो गए थे. बच्चों की तलाश में SIT, झालसा, बचपन बचाओ आंदोलन और कई राज्यों की पुलिस जुटी थी रांची पुलिस ने बच्चों की सूचना देने वालों के लिए 4 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था.
18 राज्यों की पुलिस अंश और अंशिका को खोजने में लगी थी
सीएम ने दी पुलिस को बधाई
बच्चों के मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी खुशी जाहिर की है. उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “अपहरणकर्ताओं के चंगुल से आजाद हुईं दो मासूम जिंदगियां. आखिर कोई इतना कैसे गिर सकता है? व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए पिछले कुछ दिन काफी परेशान करने वाले रहे. शुरुआत में सफलता नहीं मिल रही थी लेकिन फिर जिस ढंग से दूसरे राज्य में हुई इसी ढंग की घटना के तार जोड़ रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंच कर बच्चों को मुक्त करवाया है, वह प्रशंसनीय है.
सीएम ने कहा कि हम इस जांच अभियान को यहीं नहीं छोड़ने जा रहे हैं. राज्य एवं राज्य से बाहर घटित हुई ऐसी घटनाओं का गहन पड़ताल करते हुए, अपराधी गिरोह की कमर तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी. मासूमों के सुरक्षित मिलने से परिजनों के साथ-साथ पूरे इलाके ने राहत की सांस ली. बच्चों के 12 दिन बाद सकुशल घर लौटने की खबर से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. बच्चों की बरामदगी के बाद माता-पिता ने स्थानीय युवकों और पुलिस का धन्यवाद किया है. साथ ही पुलिस और मदद करने वालों का आभार जताया है.
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