ई-कचरे से निकलेगा सोना-चांदी, जमशेदपुर में ट्रेनिंग शुरू

इलेक्‍ट्रॉन‍िक सामान से सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं को न‍िकालने वालों को ट्रेन‍िंग दी जा रही है. अब वैज्ञान‍िक तरीके से न‍िकाला जाएगा, जिससे प्रदूषण नहीं होगा.

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ई-कचरा से सोना-चांदी निकालने के लिए जमशेदपुर में ट्रेनिंग दी जा रही है. (NDTV)

पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और सर्किट बोर्ड जैसे ई-कचरे को अब केवल बेकार सामग्री नहीं माना जाएगा. इनमें मौजूद सोना, चांदी और तांबे जैसी बहुमूल्य धातुओं को स्वदेशी तकनीक से न‍िकाला जाएगा. ये तकनीक असंगठित ई-कचरा कारोबारियों तक पहुंचाया जा रहा है. इसी उद्देश्य से सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML), जमशेदपुर में सोमवार से एक सप्ताह का विशेष ‘मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम' शुरू हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने किया.

50 मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार

परियोजना प्रमुख डॉ. मनीष कुमार झा ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 50 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं. ये प्रशिक्षक आगे देशभर में 300 दिनों तक चलने वाली कार्यशालाओं का संचालन करेंगे. इन कार्यशालाओं के माध्यम से करीब 15 हजार असंगठित ई-कचरा ऑपरेटरों और कबाड़ संग्राहकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा. कार्यक्रम में टेरी और रेकार्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के विशेषज्ञ भी भाग ले रहे हैं.

खुले में ई-कचरा नहीं जलेगा 

डॉ. झा ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली के सीलमपुर और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में ई-कचरे को खुले में जलाकर या खतरनाक रसायनों का उपयोग कर धातुएं निकाली जाती हैं. इससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं. एनएमएल द्वारा विकसित तकनीकों के जरिए बिना प्रदूषण फैलाए प्रतिदिन 100 से 300 किलोग्राम सर्किट बोर्ड और लगभग 400 किलोग्राम प्लास्टिक ई-कचरे का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण संभव होगा.

30 MSME इको-पार्क क्लस्टर बनेंगे 

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  द्वारा प्रायोजित इस राष्ट्रीय परियोजना में सी-मेट  हैदराबाद और सिपेट-लार्पम, भुवनेश्वर भी सहयोगी संस्थानों के रूप में शामिल हैं. योजना के तहत विभिन्न राज्यों में 30 एमएसएमई इको-पार्क क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे. इन क्लस्टरों के माध्यम से असंगठित क्षेत्र में कार्यरत छोटे कारोबारियों को संगठित ‘माइक्रो एंटरप्रेन्योर' के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे उनकी आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

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पर्यावरण संरक्षण और रोजगार मिलेगा 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से ई-कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि हजारों लोगों को सुरक्षित रोजगार और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ भी प्राप्त होगा. यह कार्यक्रम भारत में ई-कचरा प्रबंधन को अधिक संगठित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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