बोकारो पुलिस अधीक्षक ने पुष्पा महतो हत्याकांड की जांच कर रही SIT टीम के सभी 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. पुष्पा महतो हत्याकांड में जांच के दौरान भारी लापरवाही के चलते फैसला लिया गया है. परिजनों ने शुरू से ही आरोपी दिनेश कुमार महतो पर शक जताया था, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया. जब जांच आगे बढ़ी तो दिनेश को हिरासत में लिया गया और पूरे मामले का खुलासा हुआ. इसके बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए. झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़े निर्देश दिए थे. मामले में डीजीपी और बोकारो के एसपी को भी अदालत में तलब किया गया था. न्यायालय के दखल और डीआईजी संध्या रानी मेहता की जांच के बाद मामले में तेजी आई. जब जांच रिपोर्ट में पिंड्राजोरा थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही पाई गई, तो पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी.
9 महीने तक लंबित रहा मामला
हत्याकांड की जांच का जिम्मा संभाल रहे थाना प्रभारी समेत कई अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण मामला 9 महीने तक लंबित रहा. मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने पुष्पा महतो के प्रेमी और संदिग्ध आरोपी दिनेश कुमार महतो को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पूछताछ में उसने जो सच उगला, उसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 21 जुलाई 2025 को पुष्पा अपने घर से नामांकन के लिए चास कॉलेज गई थी. वहीं आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर सुनसान जगह पर ले गया और धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी. हत्या की वजह सिर्फ उसपर शादी का दबाव था. पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया है और डीएनए टेस्ट के जरिए कंकाल की पुष्टि की प्रक्रिया भी जारी है.
पुलिस पर उठे सवाल
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का भी आईना बन गया है. अगर समय रहते पुलिस सक्रिय होती, तो शायद यह मामला इतना लंबा नहीं खिंचता और एक परिवार को 9 महीने तक न्याय के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता. फिलहाल, आरोपी सलाखों के पीछे है, लेकिन यह कांड पुलिस की छवि पर गहरा दाग छोड़ गया है.
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