डोडा में शहबाज शरीफ और असीम मुनीर के पोस्टर, पुलिस ने दर्ज की FIR

जम्मू‑कश्मीर के डोडा जिले के पुल डोडा इलाके में दीवारों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के पोस्टर दिखने के बाद हड़कंप मच गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में पाक पीएम और मुनीर के पोस्टर लगाए जाने का मामला सामने आया है
  • पोस्टरों में पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के प्रयासों की सराहना की गई है
  • सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पोस्टर दिखाए गए हैं जिनके जरिए माहौल बिगड़ने की आशंका जताई गई है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

जम्मू‑कश्मीर के डोडा जिले के ‘पुल डोडा' इलाके में दीवारों पर विवादित पोस्टर लगाए जाने का मामला सामने आया है. इन पोस्टरों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की तस्वीरें और पाकिस्तान का झंडा नजर आ रहा है. इन पोस्टरों को कथित तौर पर ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट' नामक संगठन द्वारा चस्पा किया गया है. पोस्टरों में पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के प्रयासों की तारीफ की गई है.

इसके साथ ही कश्मीर के संघर्ष को नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देने के लिए पाकिस्तान का आभार जताया गया है. पुलिस अधिकारी के मुताबिक सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक पोस्टर दिखाई दे रहा है। वीडियो के साथ जियो‑टैगिंग भी की गई थी, जिसके आधार पर यह डोडा के ब्रिज वाले इलाके का बताया जा रहा है. वायरल वीडियो में कुछ आपत्तिजनक शब्द लिखे होने की बात कही गई है, जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका जताई गई.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामला सामने आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है. जांच के दौरान अभी तक मौके से कोई पोस्टर बरामद नहीं हुआ है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो किसी तरह का एआई‑जनरेटेड वीडियो तो नहीं है. पुलिस के अनुसार पूरा मामला फिलहाल जांच का विषय है। इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच शुरुआती चरण में है.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti |CM Yogi On Namaz: बीच डिबेट Maulana Rashidi ने क्यों किया कांवड़ यात्रा का जिक्र?