राज्य सभा में बीजेपी की मजबूती का साल, जान लें ऊपरी सदन में आखिर कैसे फरहाएंगे परचम

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को एक सीट मिलने की संभावना है जबकि असम में एनडीए के पास अभी तीनों सीटें हैं लेकिन इसमें से एक सीट इंडिया गठबंधन के पास जा सकती है. तमिलनाडु में मौजूदा स्थिति बने रहने की संभावना है. कुल मिला कर इस साल होने वाले राज्य सभा चुनाव के पहले दौर में एनडीए को बढ़त मिलने की संभावना है.

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राज्य सभा को लेकर बीजेपी ने कसी अपनी कमर
NDTV
नई दिल्ली:

केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य सभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है. दस राज्यों की इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्य सभा की तस्वीर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पक्ष में और मजबूती से दिखाई देगी. बल्कि इस साल का आंकड़ा देखें तो 71 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है जहां एनडीए ऐतिहासिक प्रदर्शन कर 40 से भी अधिक सीटें जीत सकता है. जबकि कांग्रेस बहुत बुरी स्थिति में पहुंचेगी और 17 राज्यों में उसका राज्य सभा का कोई सांसद नहीं रहेगा. इस साल जून-जुलाई में 23 और नवंबर में 11 (सभी उत्तर प्रदेश) सदस्य रिटायर होंगे.

16 मार्च को होने वाले राज्य सभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को महाराष्ट्र और बिहार में सबसे अधिक फायदा पहुंचने की उम्मीद है. एनडीए महाराष्ट्र की सात में से 4-5 सीटें जीत सकता है जबकि अभी उसके पास तीन सीटें ही हैं. इसी तरह बिहार में एनडीए के पास अभी पांच में से तीन सीटें हैं. नौबत आने पर एनडीए सभी पांच सीटें जीतने की स्थिति में भी है.

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को एक सीट मिलने की संभावना है जबकि असम में एनडीए के पास अभी तीनों सीटें हैं लेकिन इसमें से एक सीट इंडिया गठबंधन के पास जा सकती है. तमिलनाडु में मौजूदा स्थिति बने रहने की संभावना है. कुल मिला कर इस साल होने वाले राज्य सभा चुनाव के पहले दौर में एनडीए को बढ़त मिलने की संभावना है. 37 में से कम से कम 21 सीटें एनडीए के खाते में जा सकती हैं जबकि इंडिया गठबंधन को चार सीटों का नुकसान हो सकता है और उसे 15 सीटों पर जीत मिल सकती है. कांग्रेस को तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कुछ फायदा मिल सकता है.
 

बीजेपी के पास अभी राज्य सभा में 103 सांसद हैं. उसके इतिहास की यह सर्वाधिक संख्या है. जबकि सहयोगी दलों के साथ यह संख्या 126 है जो बहुमत के मौजूदा आंकड़े 122 से अधिक है. जो 36 सदस्य रिटायर हो रहे हैं उनमें बीजेपी के सहयोगी दलों के दो मंत्री भी हैं. आरपीआई ए के अध्यक्ष और केंद्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले और जनता दल यू के नेता और कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर.

संभावना है कि ये दोनों फिर से राज्य सभा में चुन कर आएं. राज्य सभा के उपसभापति और जेडीयू नेता हरिवंश का कार्यकाल भी अप्रैल में समाप्त हो रहा है. वे दो बार राज्य सभा के लिए चुने गए हैं और ऐसे में संकेत है कि उन्हें शायद पार्टी तीसरी बार राज्य सभा न भेजे. ऐसा होने पर राज्य सभा के नए उपसभापति का चुनाव भी कराना पड़ सकता है.

जहां तक बीजेपी का प्रश्न है, पार्टी इस अवसर का लाभ चुनावी राज्यों असम, पश्चिम बंगाल में बड़ा संदेश देने के लिए इस्तेमाल करेगी. इन राज्यों से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए राज्य सभा के लिए उम्मीदवार चुने जाने की संभावना है. बिहार की तस्वीर भी दिलचस्प होगी. यह देखना होगा कि बीजेपी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्य सभा भेजती है या नहीं. हालांकि, पार्टी के आला सूत्रों ने संकेत दिया है कि नवीन बिहार विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे. ऐसा पहले भी हुआ है जब राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए नितिन गडकरी और अमित शाह विधानसभा के सदस्य बने रहे थे.

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