Explained: परिसीमन, कोटा और सीटों का फार्मूला... महिला आरक्षण पर टकराव के 5 प्वाइंट, आखिर क्या चाहता है विपक्ष

Women Reservation: संसद में महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम में कुछ बदलावों के साथ सरकार आज संसद के विशेष सत्र में तीन विधेयक पेश कर रही है. इसके तहत संसद में एक तिहाई आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा.

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Women Reservation Nari Shakti Vandan Adhiniyam Amendment: महिला आरक्षण बिल
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव 2029 के पहले संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है. संसद में गुरुवार से शुरू हो रहे 3 दिनों के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन से जुड़े तीन विधेयक सरकार पेश करेगी. सरकार ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून पारित कराया था, लेकिन अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने और उसके आधार पर संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने का फैसला किया था. ऐसे में इसे 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले करा पाना संभव नहीं था. लिहाजा अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और सीटें तय करना चाहती है, ताकि इसमें देरी न हो, लेकिन परिसीमन, टाइमिंग, उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में सीटों के अंसुतलन जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष में गहरे मतभेद उभर आए हैं.   

संसद ये तीन विधेयक पेश होंगे

1. संविधान संशोधन विधेयक 2026

लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए नया संविधान संशोधन विधेयक (constitutional amendment bill) पेश किया जा रहा है. लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 (815 राज्यों की और 35 केंद्रशासित प्रदेश) करने की तैयारी है. सरकार अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन करना चाहती है. पहले यह नियम था कि परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होगा. अब सरकार इस शर्त को हटाकर 2011 की जनगणना के आधार पर भी परिसीमन करने का अधिकार चाहती है ताकि देरी न हो और इसे लोकसभा चुनाव 2029 से लागू कराया जा सके.

2. परिसीमन विधेयक क्या है

डिलिमिटेशन बिल (Delimitation Bill 2026) आरक्षण लागू करने का तौरतरीका तय करेगा. इसमें एक नया परिसीमन आयोग गठन का प्रावधान है, जो सीटों की नई सीमाएं तय करेगा. आयोग तय करेगा कि 850 सीटों में से कौन सी 273 सीटें (33 फीसदी) महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी. लेकिन सीटों के निर्धारण का फॉर्मूला नहीं बताया गया है. बिल तय करेगा कि हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों का कैसे रोटेशन होगा ताकि हर इलाके को लाभ मिले.

3. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 

यह विधेयक (Enabling Bill) दिल्ली समेत केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के लिए है. दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं में भी 33% महिला आरक्षण को लागू किया जाएगा. इस 'इनेबलिंग बिल' की जरूरत है ताकि पूरे देश में एक साथ आरक्षण लागू हो सके.

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मोदी सरकार का नया प्लान 

अगली जनगणना के इंतजार की बजाय वर्ष 2011 के आंकड़ों का इस्तेमाल कर परिसीमन कराया जाए. लोकसभा की सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि किसी भी मौजूदा पुरुष सांसद की सीट कम न हो और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण भी मिल जाए. कांग्रेस, सपा और डीएमके जैसे दलों का कहना है कि 2011 के पुराने डेटा पर परिसीमन करना और लोकसभा की सीटें अचानक बढ़ाने का तरीका वैज्ञानिक नहीं है. इससे जनसंख्या कंट्रोल करने वाले तमिलनाडु, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा.

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विपक्ष की 5 बड़ी आपत्तियां 

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट और द्रमुक जैसे दलों का कहना है कि महिला आरक्षण लागू कराने के सरकार के तौरतरीके पर उसको आपत्ति है. इसमें जनगणना के पुराने आंकड़े, परिसीमन में सीटों का फॉर्मूला तय न करने जैसी बातें शामिल हैं. 

1. महिला आरक्षण में भी OBC कोटा

समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों की आपत्ति है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए महिला आरक्षण के भीतर आरक्षण है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए नहीं है. विपक्ष का कहना है कि इससे आरक्षण का लाभ केवल खास वर्ग की महिलाओं तक सीमित रह जाएगा।.

2. परिसीमन की शर्त पर घोर आपत्ति

सरकार ने पहले महिला आरक्षण को लागू करने के लिए नई जनगणना कराने और उसके बाद परिसीमन की शर्त रखी थी. लेकिन अब इसे 2011 की जनगणना के आधार पर कराने की तैयारी है. परिसीमन में किस फॉर्मूले पर सीटें तय होंगी, ये नहीं बताया गया है.

3. उत्तर-दक्षिण का असंतुलन

दक्षिण भारत के राज्यों केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना को डर है कि अगर आबादी के आधार पर परिसीमन हुआ तो जनसंख्या में कमी के कारण उनकी लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी. लेकिन यूपी, बिहार जैसे राज्यों में बंपर सीटें बढ़ेंगी. विपक्ष इसे संघीय ढांचे पर हमला और विभाजनकारी बता रहा है. विपक्ष का तर्क है कि सरकार को जनगणना का इंतजार करने के बजाय इसे तत्काल मौजूदा 543 सीटों पर लागू करना चाहिए.

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4. 2011 की जनगणना का आधार

विपक्ष का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू कर सरकार अगले लोकसभा चुनाव के पहले राजनीतिक लाभ लेना चाहती है. जब मौजूदा जनगणना चल रही है तो सबसे सटीक वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर इसे लागू किया जाए. जनगणना और परिसीमन से जोड़कर सरकार अपना एजेंडा लागू करना चाहती है.

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5. इन बिलों को लाने की जल्दबाजी क्यों

सरकार का कहना है कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में शर्त थी कि आरक्षण अगली जनगणना के बाद ही लागू होगा, लेकिन कोरोना और अन्य कारणों से 2021 की जनगणना टलती रही और अब वह 2026-27 तक संभावित है. ऐसे में महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू हो पाना मुश्किल है.

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परिसीमन पर सरकार का तर्क 

मोदी सरकार का तर्क है कि बिना परिसीमन के यह तय करना असंभव है कि लोकसभा कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. परिसीमन एक कानूनी पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं कर सकते. 2026-27 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन के साथ 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाएं आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ सकेंगी. इसमें 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव है, ताकि 2029 चुनाव से पहले सीटों का बंटवारा हो सके. विपक्ष का मानना है कि यह पिछड़ों और दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश है.
 

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