ट्रंप और वाइकिंग में कई समानताएं, एक पागल हाथी जैसे मेज पीट रहा हो-विलियम डैलरिम्पल Exclusive 

विलियम डैलरिम्पल ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि वैश्विक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं. ट्रंप की नीतियों, ग़ज़ा‑ईरान हालात और ग्रीनलैंड विवाद को उन्होंने विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा बताया.

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  • इतिहासकार विलियम डैलरिम्पल ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में वैश्विक भू-राजनीति की गंभीर चिंताओं पर चर्चा की
  • डैलरिम्पल ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी विश्व व्यवस्था के खत्म होने और शक्ति-राजनीति के बढ़ने की बात कही
  • उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को खतरनाक बताया और उनकी तुलना अस्थिर निर्णय लेने वाले हेनरी आठवें से की
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जयपुर:

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के समापन दिवस पर इतिहासकार और लोकप्रिय पॉडकास्ट “एम्पायर वर्ल्ड हिस्ट्री” के होस्ट विलियम डैलरिम्पल ने वैश्विक भू‑राजनीति से जुड़ी कई गंभीर चिंताओं पर खुलकर बातचीत की. हर महीने 10 लाख से अधिक डाउनलोड पाने वाला उनका पॉडकास्ट दुनिया भर में सुना जाता है, और उनकी समझ मौजूदा अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को एक अनोखे ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखने का मौका देती है. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने ग़ज़ा, ग्रीनलैंड, ईरान और वैश्विक शक्ति संतुलन पर अपने विचार रखे.

वैश्विक स्थिरता का युग खत्म हो रहा है: विलियम डैलरिम्पल 

डैलरिम्पल ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी विश्व‑व्यवस्था आज बिखरने के कगार पर है. उनके शब्दों में “वैश्विक स्थिरता का युग खत्म हो रहा है, और इसकी जगह शक्ति‑राजनीति ले रही है.” उन्होंने खासकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को दुनिया की शांति के लिए “खतरनाक” बताया. ट्रंप की तुलना उन्होंने हेनरी आठवें से की एक ऐसा शासक जो शक्तिशाली था, लेकिन अस्थिर निर्णयों के लिए बदनाम. उन्होंने कहा कि इतिहास नाज़ुक अहंकार वाले नेताओं से भरा पड़ा है, और ऐसे नेता अक्सर असंतुलित फैसले लेते हैं.

ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर रूख पागलपन जैसा: डैलरिम्पल 

डैलरिम्पल के अनुसार ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर रूख, गजा में तनाव को लेकर उनके बयान, और वेनेज़ुएला‑ईरान जैसे देशों पर दिए गए संकेत “पैरोडी से परे, लगभग पागलपन जैसे” हैं. उनका कहना था कि युद्धोत्तर दौर में जिन संस्थाओं जैसे संयुक्त राष्ट्र को विश्व शांति के लिए बनाया गया था, वे आज अपना प्रभाव खो रही हैं. “शांति अब सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को मिलती है,” उन्होंने कड़े शब्दों में कहा.

ईरान को लेकर डैलरिम्पल क्यों हो गए भावुक?

ईरान पर बात करते हुए डैलरिम्पल भावुक दिखे. उन्होंने अपने शुरुआती यात्राओं का ज़िक्र किया जब ईरान मध्य‑पूर्व के सबसे खुले और समृद्ध देशों में गिना जाता था. लेकिन दमन, गुप्त पुलिस और धार्मिक कट्टरता के उभार ने देश को एक अलग दिशा दे दी. आज की स्थिति पर उन्होंने कहा कि “20,000 से अधिक मौतों की खबरें आ रही हैं. परिवारों को नहीं पता कि उनके लोग ज़िंदा हैं या नहीं कुछ बेहद भयावह हुआ है.”

ग्रीनलैंड के सवाल पर उन्होंने अपने पॉडकास्ट में शामिल वाइकिंग इतिहास को याद किया, लेकिन चेताया कि आज का ग्रीनलैंड विवाद युद्धोत्तर स्थिरता के अंत का प्रतीक है. “अगर वाइकिंग्स भी होते, तो शायद हालात बहुत अलग नहीं होते,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि वैश्विक प्रणालियाँ टूट रही हैं और दुनिया एक खतरनाक मोड़ पर खड़ी है.

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