किसानों को पता ही नहीं मिट्टी में है कितना 'सोना'

अगर किसी को अपने खेत की जमीन की उपजाऊ क्षमता जाननी है तो उसे खेत की मिट्टी का लैब टेस्ट कराना होता है. मगर मध्य प्रदेश के किसानों लैब की कमी के कारण अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में नहीं जान पाते हैं.

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मध्य प्रदेश में मिट्टी की जांच करने वाली लैब खस्ताहाल
भोपाल:

भारत कृषि आधारित देश है, ये तो हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं. ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि जो जमीन जितनी उपजाऊ होती है, वहां उतनी बढ़िया खेती होती है. फलती-फूलती फसल ही गांवों में खशहाली लेकर आती है. इसलिए किसानों को अपनी जमीन की मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में पता होना जरूरी है. अगर किसी को अपने खेत की जमीन की उपजाऊ क्षमता जाननी है तो उसे खेत की मिट्टी का लैब टेस्ट कराना होता है. मगर मध्य प्रदेश के किसान लैब की कमी और उनमें स्टाफ की कमी के चलते मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में नहीं जान पाते हैं.

शिवपुरी में 5 लाख से ज्यादा किसान, मिट्टी जांचने को 1 कमरे की लैब

शिवपुरी में जिले की एकमात्र लैब है, लेकिन स्टाफ की कमी से काम धीमा है. यहां के किसान कहते हैं पहले सैंपल नहीं लिया जाता, सैंपल ले भी लें तो उसकी रिपोर्ट नहीं मिलती. जहां मिट्टी के लिए जरूरी हैं 18 से ज्यादा पोषक तत्व, लेकिन लैब में सिर्फ आठ ही जांचे जाते हैं. शिवपुरी जिले में 5 लाख से ज्यादा किसान हैं, मिट्टी जांचने एक कमरे की लैब है. जिसमें सैंपल भरे रखे हैं. लेकिन उन्हें जांचने नाम मात्र के लिये स्टाफ की नियुक्ति की गई है. 

खरगोन में 35 लाख में बनी लैब में स्टाफ ही नहीं

खरगोन में 8 साल पहले 35 लाख की लागत से लैब जरूर बनी, लेकिन ना यहां पर्याप्त संसाधन है और ना ही स्टाफ. यहां की जर्जर हो रही बिल्डिंग की हालत देखकर ही मालूम हो जाएगा कि यहां सब भगवान भरोसे चल रहा है. छतरपुर जिले के 7 ब्लाकों में मिट्टी परीक्षण के लैब बनकर तैयार हैं, बस पूरी तरह खुले नहीं हैं ... वजह वही टेक्नीशियन और कर्मचारियों की नियुक्ति हुई ही नहीं. 

सीहोर में 1.20 करोड़ से बनी लैब किसी काम की नहीं

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के कृषिमंत्री का जिला सीहोर यहां 1.20 करोड़ से मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला बनी है. लेकिन वो किसानों के किसी काम की नहीं ... कई ब्लॉकों में ताला लगा है जो खुला है वो जिला मुख्यालय की लैब, यहां बहुत कुछ तो महज शोपीस ही लग रहा है. वजह वही .. लैब में स्टाफ ही नहीं है. हर प्रयोगशाला में कम से कम 10 लोगों का स्टाफ जरूरी है लेकिन यहां लैब टेक्नीशियन तक नहीं.

उमरिया और शहडोल में भी लैब की हालत खराब

उमरिया में डेढ़ लाख से अधिक किसान परिवार हैं, करीब 1 लाख खरीफ का और  60 हजार रबी की फसलों का रकबा है ... मिट्टी परीक्षण के लिए उमरिया पाली और मानपुर में लैब बनी. जिनमें से उमरिया की लैब चालू है और दूसरी बंद. शहडोल जिला मुख्यालय में लैब है, जरूरी सामान भी है. मगर यहां बस 7 लोगों का स्टाफ स्वीकृत हैं. साल भर में 12,000 सैंपल जांचने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन सिर्फ डेढ़ हजार सैंपल ही जांचे गए हैं.

टीकमगढ़ में 2 लाख किसानों के खेतों की मिट्टी जांचने हर ब्लॉक में लैब बनी जरूर है. लेकिन किसान कहते हैं एक तो स्टाफ कम है, जो हैं वो वक्त पर बैठते नहीं. श्योपुर जिला मुख्यालय में लैब है जहां एक लैब टेक्निशियन लैब के साथ विभाग के प्रशासनिक काम भी देखते हैं. जिले के विजयपुर और कराहल में लाखों की बिल्डिंग में ताला पड़ा है, करीब पांच लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ जिला मुख्यालय में जांच हो रही है वो भी सिर्फ कहने के लिए.

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मैहर जिले के तीनों ब्लॉक की लैब में लगा है ताला

मैहर जिले के तीनों ब्लॉक मुख्यालयों मैहर, अमरपाटन,और रामनगर में मिट्टी परीक्षण लैब में ताला जड़ा है, खुला भी रहता तो क्या ही होता. क्योंकि यहां ना मशीन है और ना ही स्टाफ. राज्य में मिट्टी की सेहत जांचने 6,31,437 स्वाइल हेल्थ कार्ड का लक्ष्य था. उसने बना दिये 11,89,505 यानी कि 188.38 प्रतिशत ज्यादा. इस पर सरकार से सीधा सवाल पूछा गया.  केन्द्र सरकार के ही आंकड़े कहते हैं कि मध्यप्रदेश में 2023-24 में  1246700 टेस्ट होने थे, 558489 सैंपल इकठ्ठा हुए और 260484 टेस्ट पूरे हुए.

मिट्टी के पोषक तत्वों का पता होना क्यों जरूरी

पहले देश की मिट्टी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी थी, 90 के दशक में पोटैशियम और सल्फर अब हमारी मिट्टी में जिंक और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की बहुत कमी है. लेकिन शायद ही किसी किसान को पता लग पाता है कि आखिर उसकी मिट्टी में कमी है तो क्या. मिट्टी की एक इंच परत बनने में कई सौ साल लगते हैं, हमारा भोजन मिट्टी से ही बनता है, लेकिन उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग और खेती के गलत तरीके ने हमारी थाली खराब कर दी है, यूरिया से नाइट्रोजन साइकिल प्रभावित हुआ है, सरकार उर्वरकों पर लाखों करोड़ों की सब्सिडी देती है लेकिन दुर्भाग्य देखिये किसानों को ये तक नहीं पता कि उनकी मिट्टी किस तत्व से पोषक बनेगा ... यानी इस लापरवाही से हमारा, आपका, किसानों का और देश का पूरा नुकसान.

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