मॉनसून पर लगा ब्रेक, यूपी, बिहार से दिल्ली-NCR तक रूठा मौसम, जानें कब लौटेगी बारिश

Monsoon Rain Update: मॉनसून पर जुलाई में अचानक से ब्रेक लग गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अपडेट के मुताबिक 15 जुलाई में बारिश में भारी गिरावट हुई है. ऐसे में कब मॉनसून लौटने वाला है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

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क्या हो पाएगी बारिश की भरपाई
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  • मॉनसून पर जुलाई के महीने में ब्रेक लगा हुआ है. अब तक उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है.
  • देशभर में अब तक 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है. ऐसे में आगे बरसात कब तक होगी.
  • मौसम विभाग ने मॉनसून को लेकर नई जानकारी दी है. जिससे आने वाला समय अहम होगा.

देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून पर ब्रेक लगा हुआ है. उत्तर भारत के राज्यों में मॉनसून की रफ्तार सुस्त है. ऐसे में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान नजर आ रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में गर्मी परेशान कर रही है. जुलाई के महीने में बारिश कम होने से किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है. जबकि जरुरत का पानी अब तक कितना भर पाया है यह भी सवाल उठने लगा है. ऐसे में लोग अब आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर बारिश की वापसी कब होगी. सब यह भी जानना चाहते हैं कि मॉनसून के रुकने की वजह क्या है और क्या आगे इसकी भरपाई देश में पाएगी, क्योंकि फिलहाल एक हफ्ते से अच्छी बारिश नहीं हुई है. 

जुलाई में कितनी कम हुई बारिश

जुलाई के महीने में बारिश पर ब्रेक लगी हुई है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक जुलाई के शुरुआती हफ्ते में देश के कई राज्यों में खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से 20 से 35 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. हालांकि जून में प्री-मॉनसून और शुरुआती मॉनसून की वजह से देश में बारिश का कोटा अच्छा था. अचानक से जुलाई में मॉनसून पर लगे लंबे ब्रेक ने चिंता बढ़ा दी है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-NCR जैसे इलाकों में सूखे जैसे हालात दिखने लगे हैं. क्योंकि जुलाई का दूसरा हफ्ता पूरी तरह से सूखा ही गुजरा है.

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  • 15 जुलाई तक पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 348 मिलीमीटर बारिश हुई है.  सामान्य तौर पर अब तक 540 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए. इस हिसाब से यहां 36 प्रतिशत की गिरावट हुई है. 
  • उत्तर पश्चिम भारत में 137 मिलीमीटर बारिश दर्ज है. अब तक यहां 168 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए. यहां 19 प्रतिशत की गिरावट है. 
  • मध्य भारत में 273 मिलीमीटर बारिश है, जबकि यहां 315 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए. इस हिसाब से यहां 13 प्रतिशत बरसात कम हुई है. 
  • दक्षिण भारत में फिलहाल 190.0 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड है. जबकि यहां औसत तौर पर 255.3 मिलीमीटर तक बारिश हो जानी चाहिए. इस हिसाब से यहां 26 प्रतिशत की कमी है. 
  • कुल मिलाकर 15 जुलाई तक पूरे देश में 227.0 मिलिमीटर बारिश हो चुकी है. लेकिन सामान्य तौर पर अब तक 294.2 प्रतिशत बारिश होनी चाहिए. इस हिसाब से देशभर में अब तक 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है. 

मॉनसून ट्रफ लाइन खिसकी

बारिश नहीं होने की सबसे बड़ी वजह मॉनसून ट्रफ लाइन का हिमालय की तरफ खिसकना माना जा रहा है. बारिश लाने वाली हवाएं अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर हिमालय की तलहटी की तरफ जा चुकी हैं. जिससे मैदानी इलाकों में शुष्क हवाएं खत्म हो चुकी है. यही वजह है कि उत्तर पश्चिमी राज्य सूखे हैं और केवल पहाड़ी राज्यों या पूर्वोत्तर में अच्छी बारिश हो रही है. पिछले 24 घंटे के दौरान असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय में अच्छी बारिश है. जबकि दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य सूखे हैं. 

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अल नीनो का असर 

भारत के मॉनसून पर अल नीनो का भी असर दिख रहा है. प्रशांत महासागर में अल नीनो फिर मजबूत प्रभाव में हैं. यहां समुद्र की सतह लगातार गर्म हो रही है. जिससे भारतीय मॉनसून को मिलने वाली नमी और हवाओं की रफ्तार कमजोर पड़ रही है. ऐसे में हवा के कमजोर पैटर्न ने मॉनसून की रफ्तार को धीमा कर दिया है. 

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बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम नहीं 

बंगाल की खाड़ी में लगातार बनने वाले सिस्टम से ही देश में हर साल जुलाई के महीने में झमाझम बारिश होती है. लेकिन यहां पिछले कुछ दिनों से लगातार कम दबाव के क्षेत्र नहीं बन रहा है. कोई भी सिस्टम एक्टिव नहीं होने से मॉनसून की हवाओं को आगे नहीं खींचा जा रहा है. जिससे देश के उत्तरी राज्यों में मॉनसून पूरी तरह से कमजोर हो गया है. 

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क्या हो पाएगी बारिश की भरपाई 

जुलाई में मॉनसून पर लगे ब्रेक ने आम लोगों से लेकर किसानों तक की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में सबके दिमाग में यह सवाल चल रहा है कि कि बारिश की भरपाई हो पाएगी या नहीं ?. लेकिन भारतीय मौसम विभाग की तरफ से आ रही जानकारी पर नजर डाली जाए तो आम जनता और किसानों के लिए राहत की यह बात यह है कि मॉनसून पर लगा यह ब्रेक स्थायी नहीं है. आईएमडी का अनुमान है कि जुलाई के आखिरी हफ्ते से मॉनसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है. क्योंकि बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिससे हवाओं का रुख बदलेगा. जबकि मौसम वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि अगस्त के महीने तक अल नीनो की स्थिति थोड़ी कमजोर होगी. जिससे बारिश की स्थिति में थोड़ा सुधार आएगा. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले हफ्तों में होने वाली झमाझम बारिश से जुलाई के इस घाटे की भरपाई कुछ हद तक हो सकती है. लेकिन इसके लिए मौसम का मिजाज बेहद अहम होने वाला है. 

16 से 20 जुलाई तक हो सकती है बारिश 

मौसम विभाग ने 16 से 20 जुलाई के बीच मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद है. अगले 48 घंटों में दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड, समेत मध्य भारत के लिए नया अलर्ट जारी है. यानि अगर अगले कुछ घंटे में बारिश होती है तो मॉनसून की स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है.

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