संगठन को लेकर अचानक क्यों छलका दिग्विजय सिंह का दर्द, जानिए इनसाइड स्टोरी

दिग्विजय सिंह के तीसरे कार्यकाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. वे राज्यसभा से रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में कमलनाथ, मीनाक्षी नटराजन जैसे बड़े दावेदार कतार में हैं. पार्टी के नए नेतृत्व- खासकर जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को लंबे समय से 'दिग्विजय विरोधी' माना जाता है. ऐसे में दिग्विजय सिंह का अचानक 'बागी तेवर' दिखाना सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत है.

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फाइल फोटो

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो रहा है. तीसरे कार्यकाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि कमलनाथ, मीनाक्षी नटराजन जैसे बड़े दावेदार कतार में हैं. पार्टी के नए नेतृत्व- खासकर जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को लंबे समय से 'दिग्विजय विरोधी' माना जाता है. ऐसे में दिग्विजय सिंह का अचानक 'बागी तेवर' दिखाना सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत है.

दिग्विजय सिंह के ताजा ट्वीट ने नई बहस छेड़ दी है. CWC बैठक शुरू होने से ठीक कुछ घंटे पहले दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर पोस्ट की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे दिखते हैं. दिग्विजय सिंह ने लिखा, 'RSS का जमीनी स्वयंसेवक और BJP का जमीनी कार्यकर्ता नेताओं की चरणों पर बैठकर CM और PM बना… यह संगठन की शक्ति है.'

यह पोस्ट महज़ एक पुरानी फोटो शेयर करना नहीं है. यह कांग्रेस के भीतर एक संदेश छोड़ता दिख रहा है. दिग्विजय सिंह का RSS–BJP संगठन की ताकत को लेकर ऐसा सार्वजनिक बयान देना पहले ही पार्टी के भीतर विवाद का कारण बन चुका है.

क्या यह कांग्रेस नेतृत्व पर हमला है?

दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. 

क्या दिग्विजय कांग्रेस को संगठन की कमजोरी दिखाना चाह रहे हैं?

RSS–BJP मॉडल में जमीनी कैडर, अनुशासन और संगठनात्मक सीढ़ियां सबसे बड़ी ताकत मानी जाती हैं. दिग्विजय का 'संगठन की शक्ति' लिखना, कांग्रेस में कैडर-बेस्ड स्ट्रक्चर की कमी पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें- दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से गरमाई सियासत, PM मोदी की पुरानी फोटो शेयर कर BJP-RSS की कर दी तारीफ

क्या यह कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत है?

CWC में पहले ही दिग्विजय सिंह ने शिकायत की कि प्रदेश अध्यक्ष तो बना दिया जाता है, लेकिन कमेटियां नहीं बनतीं. दिग्विजय ने कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं हो रहा है. ऐसे में यह ट्वीट नेतृत्व को 'मजबूत संगठन बनाने' की याद दिलाने जैसा दिखता है. कुछ दिनों पहले भी दिग्विजय ने राहुल गांधी को संगठन पर ध्यान देने की नसीहत दी थी.  

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क्या यह अपने तीसरे राज्यसभा कार्यकाल से पहले दबाव बनाने की रणनीति है?

फाइल फोटो

दरअसल दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने वाला है और प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय का प्रभाव कम होता दिख रहा है. ऐसे में यह ट्वीट को दबाव बनाने की तरकीब की तरह भी देखा जा रहा है. 

दिग्विजय के ट्वीट से कांग्रेस में हलचल

सूत्रों की मानें तो ट्वीट के बाद कांग्रेस के भीतर भी इस तरह की चर्चा है कि आखिर दिग्विजय ऐसे बयान क्यों दे रहे हैं. PM मोदी और RSS को लेकर दिए गए बयान से पार्टी को असहजता हुई है.

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