- नीतीश कुमार ने जेडीयू विधायक दल का नेता अपने करीबी और अनुभवी नेता श्रवण कुमार को चुना है
- श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं और वहां दबदबा रखते हैं
- श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर 1974 के जेपी आंदोलन से शुरू हुआ और वे नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे हैं
बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे और सम्राट चौधरी के नए मुख्यमंत्री बनने के बाद भी राजनीतिक हलचल तेज है. इस बीच नीतीश कुमार ने अपने करीबी श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता चुना है. कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार को यह जिम्मेदारी मिल सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नीतीश ने श्रवण को चुन कर सबको चौंका दिया. अब सवाल है कि आखिर श्रवण कुमार कौन हैं? जिनको जेडीयू विधायक दल का नेता चुना गया है.
कौन हैं श्रवण कुमार?
श्रवण कुमार को जेडीयू सीनियर और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है. वो नीतीश कुमार के खास माने जाते हैं. इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि श्रवण नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस सीट पर उनका काफी दबदबा है. 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार आठवीं बार यहां से जीत दर्ज की है. वह नीतीश सरकार में लंबे समय तक ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभा चुके हैं. श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर 1974 के जेपी आंदोलन से शुरू हुआ था और वह समता पार्टी के समय से ही नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं.
नीतीश कुमार ने क्यों जताया भरोसा?
यह किसी से छिपा नहीं है कि जेडीयू के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार ही हैं. ऐसे में श्रवण को यह जिम्मेदारी उन्हीं ने दी है. नीतीश कुमार द्वारा उन्हें इस पद के लिए चुनने के पीछे कई ठोस वजह मानी जा रही हैं. श्रवण कुमार को नीतीश कुमार के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता है. राजनीति में उनका साथ 30 साल से भी ज्यादा पुराना है. इसके अलावा श्रवण भी कुर्मी जाति से ही आते हैं. कुर्मी समाज बिहार में बड़ा वोट बैंक है. ऐसे में नीतीश के बाद इस वोट बैंक को साधने में श्रवण कुमार बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
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पार्टी के बड़े पद संभाल चुके
श्रवण कुमार भले ही अब विधायक दल के नेता चुने गए हों, लेकिन वो लंबे वक्त से जेडीयू के बड़े पद संभालते रहे हैं. विधानसभा की कार्यवाही और पार्टी के भीतर सचेतक के रूप में उनका लंबा अनुभव है. नीतीश कुमार उन पर काफी भरोसा करते हैं. ऐसे में नीतीश की गैर मौजूदगी में भी पार्टी और विधायकों को श्रवण कुमार संभाल सकते हैं.
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