400 साल पुराने तालाब को मिली नई जिंदगी, कलियुग में घोर तप कर शिव से वरदान पाने वाले ऋषि से जुड़ा है इतिहास, सीतारमण भी पहुंचीं

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में एक ऐसा 400 साल पुराने तालाब के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन करने पहुंचीं. इस तालाक का संबंध कलियुग में घोर तप करने वाले ऋषि से जुड़ा है.

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400 साल पुराने तालाब को मिली नई जिंदगी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की पहल, स्कूल में लौटी खुशियां
नई दिल्‍ली:

पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में एक ऐसा 400 साल पुराना तालाब है, जो एक समय आसपास के गावों के लोगों की प्‍यास ही नहीं बुझाता था, बल्कि खेतों को भी पानी इसी से दिया जाता था. इतना होने के बावजूद भी इस तालाब का पानी कभी कम नहीं होता था. गर्मियों के दिनों में जब सभी नदी-नालों का पानी सूख जाता था, तब भी इस तालाब का पानी लबालब रहता था. शायद इसीलिए इस तालाब को 'मुझियन कुलम' नाम दिया गया. 'मुझियन' एक ऋषि भी थे, कुछ लेागों का मानना है कि इस तालाब का नाम उन्‍हीं के नाम पर रखा गया. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरनंकुप्पम के सरकारी मिडिल स्कूल में स्थित इस 400 साल पुराने तालाब के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन किया. इस अवसर पर लोगों के चेहरे पर मुस्‍कान थी, क्‍योंकि जो तालाब उनकी कई पीढ़ियों से जुड़ा रहा है, वो आज फिर लबालब हो गया है.  

मुझियन कुलम के क्‍या है मायने 

तमिल-मलयालम में 'मुझु/मुझि' का अर्थ होता है- पूरा, संपूर्ण, भरा हुआ. 'मुझियान' का मतलब हुआ 'पूर्णता वाला, भरा-पूरा'. 'कुलम' का मतलब 'तालाब, पोखर, छोटा जलाशय' होता है. इस तरह 'मुझियन कुलम' का शाब्दिक अर्थ हुआ- भरा हुआ तालाब. ऐसा तालाब जो हमेशा पानी से भरा रहता हो. बताया जा रहा है कि पुडुचेरी का ये मुझियन कुलम साल के 12 महीने पानी से भरा रहता था. लेकिन पिछले कुछ दशकों से तालाब लापरवाही का शिकार हो रहा था.   

कैसे अपनी पहचान खो रहा था 'मुझियन कुलम'

निर्मला सीतारमण ने पूरनंकुप्पम स्थित सरकारी मिडिल स्कूल में 400 साल पुराने 'मुझियन कुलम' (तालाब) के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन किया. इस मौके पर पुडुचेरी के माननीय उप-राज्यपाल थिरु के. कैलाशनाथन और पुडुचेरी के माननीय मुख्यमंत्री थिरु एन. रंगास्वामी भी मौजूद थे. लगभग 400 वर्षों तक, पानी का यह ऐतिहासिक स्रोत पीने के पानी का एक अहम जरिया रहा, खेती में मदद करता रहा और अंगला परमेश्वरी अम्मन मंदिर की पवित्र रस्मों के लिए पानी भी उपलब्ध कराता रहा. लेकिन समय के साथ, देखरेख की कमी, गाद जमा होने और अतिक्रमण के कारण यह तालाब अपने मूल उद्देश्य के लिए अनुपयोगी हो गया था. अब जीर्णोद्धार के बाद, पानी के इस ऐतिहासिक स्रोत को फिर से जीवित कर दिया गया है, ताकि यह एक बार फिर लोगों की सेवा कर सके.

कौन थे ऋषि मुझियन?

पुडुचेरी के तालाक का नाम एक महान ऋषि 'मुझियन' के नाम पर रखा गया है. ऋषि मुझियन दक्षिण भारत, खासकर केरल की पौराणिक कथाओं में वर्णित एक प्राचीन तपस्वी हैं. इनका नाम मुख्य रूप से मुझियन कुलम महादेव मंदिर से जुड़ा है, जो एर्नाकुलम जिले में स्थित है. केरल की लोकमान्यता के अनुसार, ऋषि मुझियन ने घोर कलियुग में धर्म की रक्षा के लिए कठोर तप किया था. उन्होंने मुझियन कुलम नामक स्थान पर एक तालाब के किनारे वर्षों तक शिव की आराधना की. ऋषि मुझियन की भक्ति प्रसन्‍न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और वर मांगने को कहा. ऋषि मुझियन ने कहा, 'प्रभु, आप यहीं विराजें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी आपका आशीर्वाद पा सकें.' भगवान शिव ने तथास्तु कहा और उसी स्थान पर स्वयंभू लिंग के रूप में स्थापित हो गए. उसी तालाब और शिवलिंग के कारण वह जगह 'मुझियन कुलम' कहलाई. मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से कुष्ठ जैसे रोग भी ठीक हो जाते थे. ऋषि मुझियन को आयुर्वेद और जल चिकित्सा का ज्ञाता भी कहा जाता है. मान्यता है कि उन्होंने तालाब के पानी में औषधीय गुण स्थापित किए थे. केरल में 'मुझियन कुलम स्नान' आज भी महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी माना जाता है. 

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निर्मला सीतारमण हाल ही में पुडुचेरी के दौरे पर थीं, शुक्रवार को वित्त मंत्री पुडुचेरी के एक सरकारी मिडिल स्कूल में 400 साल पुराने 'मुझियांकुलम' के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन करेंगी. यह प्रोजेक्ट विरासत वाली इमारतों को बचाने और साथ ही कम्युनिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक जगहों को बेहतर बनाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है.  

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Nirmala Sitharaman