- ईरान युद्ध की वजह से आशंका है कि भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमत बढ़ सकती है
- सरकारी सूत्रों का दावा है कि कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दामों पर असर नहीं पड़ेगा
- सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल और रिटेल तेल को मिलाकर करीब 50 दिनों का रिजर्व स्टॉक है
ईरान में जारी युद्ध के बीच कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं. आशंका जताई जा रही थी कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम के चलते भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ सकती है, लेकिन इस आशंका से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है.
अन्य सोर्स से तेल खरीद रही सरकार
सरकार के आला सूत्रों का कहना है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद उसका असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर नहीं पड़ेगा और इनकी कीमतें स्थिर रहने की संभावना है. सूत्रों ने बताया कि तेल आयात करने के मार्ग (होर्मुज जलडमरूमध्य) में आ रही बाधाओं के बावजूद सरकार के पास कच्चा तेल खरीदने के कई विकल्प मौजूद हैं, जिन पर काम भी चल रहा है. ऐसे में कच्चे तेल की उपलब्धता पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. उनके मुताबिक, अलग-अलग सोर्स से देश में कच्चे तेल का आयात जारी है.
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भारत के पास 50 दिनों का रिजर्व स्टॉक
सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी कि देश के पास 25 दिनों का रिटेल स्टॉक उपलब्ध है, जबकि कच्चे तेल का भी 25 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है. यानी कच्चे तेल और रिटेल तेल को मिलाकर देश के पास कुल 50 दिनों का रिजर्व स्टॉक मौजूद है. कच्चे तेल का परिशोधन (Refine) करके ही उसे पेट्रोल और डीजल के रूप में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है.
तेल के दाम और बढ़ने की संभावना नहीं
सरकार के सूत्रों का आकलन है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल के दामों में करीब 20 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज़ जरूर की गई है लेकिन इसमें और ज़्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. सूत्रों का ये भी आकलन है कि युद्ध खत्म होते ही कच्चे तेल की क़ीमतें अपने पुराने स्तर पर आ जाएंगी इसलिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं दिखती है.
युद्ध के बाद ईरान द्वारा सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आई है. इसकी वजह से दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि ईरान के घटनाक्रम पर सरकार लगातार नज़र बनाए हुए है.












