- परिसीमन को लेकर विपक्ष का आरोप है कि यूपी और बिहार की सीटें बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण भारत को नुकसान होगा
- परिसीमन आयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा गठित होता है और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज इसके अध्यक्ष होते हैं
- आयोग नवीनतम जनगणना के आधार पर राज्यों की सीटें तय करता है और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित करता है
What Is Delimitation Bill 2026? Impact on Lok Sabha Seats Explained: लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष की सबसे बड़ी आपत्ति डिलिमिटेशन बिल यानी परिसीमन विधेयक पर है. विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन में सरकार के मनमाने तरीके से उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों में बड़ा उछाल आएगा और दक्षिण भारतीय राज्यों को बड़ा नुकसान आएगा. हालांकि सरकार ने भरोसा दिया है कि लोकसभा में सभी राज्यों की सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा. 2011 की जनगणना में राज्यों की आबादी का आधार पर बाध्यकारी नहीं होगा. इसलिए सीटों का अनुपात नहीं बदलेगा.
परिसीमन विधेयक क्या है (What is Delimitation Bill 2026?)
महिला आरक्षण विधेयक में परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और ओडिशा में बीजद नेता नवीन पटनायक ने भी उनके राज्यों की सीटें घटने की आशंका जताई है.सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. संसद में सत्र के दौरान सरकार इस पर बयान भी दे सकती है.
सीटों की संख्या 850 होंगी?
केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण या नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है. इसमें से 815 लोकसभा सीटें राज्यों और बाकी 35 सीटें केंद्रशासित प्रदेशों के लिए रखी जाएंगी. दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों का नुकसान नहीं होगा. जो अनुपात अभी है, वही कायम रखा जाएगा. सीटों की कुल संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ही ये संख्या 850 होगी. प्रत्येक राज्य के लिए भी यह संख्या 50 प्रतिशत बढ़ जाएगी.
परिसीमन आयोग का गठन
महिला आरक्षण परिसीमन आयोग का गठन भारत के राष्ट्रपति करते हैं और यह निकाय चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करता है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश अध्यक्ष होते हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त सदस्य होता है.
परिसीमन की प्रक्रिया
1. डिलिमिटेशन कमीशन: परिसीमन आयोग नवीनतम जनगणना के आंकड़ों का अध्ययन करता है. आयोग यह देखता है कि किस क्षेत्र की जनसंख्या में कितनी बढ़ोतरी या कमी हुई है.
2. सीटों का आवंटन: आयोग यह तय करता है कि प्रत्येक राज्य को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कितनी सीटें दी जानी चाहिए. संविधान के अनुसार, सीटों का आवंटन ऐसे किया जाता है कि सीटों की संख्या और जनसंख्या का अनुपात पूरे देश में लगभग समान रहे.
3. सीमा निर्धारण: सीटों की संख्या तय होने के बाद डिलिमिटेशन कमीशन लोकसभा सीटों की भौगोलिक सीमा तय करता है. इसमें प्रशासनिक इकाई जैसे जिला, तहसील और ब्लॉक के साथ प्राकृतिक बनावट पहाड़, नदी आदि का ध्यान में रखा जाता है ताकि निर्वाचन क्षेत्र की आवाजाही सुगम रहे.
4. जनता से सुझाव: परिसीमन आयोग ड्राफ्ट प्रपोजल को भारत के राजपत्र और राज्य के राजपत्रों में गैजेट प्रकाशित करता है. जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाती हैं. आयोग जन सुनवाई करता है ताकि जनता और राजनीतिक दलों की शिकायतों को सुना जा सके.
5. सीटें कैसे तय होती हैं: कुल जनसंख्या को सीटों की संख्या से विभाजित करके एक औसत जनसंख्या प्रति सीट निकाली जाती है. जैसे यूपी में 25 करोड़ आबादी और 80 लोकसभा सीटें हैं तो उसको भाग देकर आंकड़ा निकाला जाता है. कोशिश की जाती है कि हर निर्वाचन क्षेत्र में लगभग उतनी ही आबादी हो. आयोग उन निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान करता है, जहां ज्यादा आबादी के आधार SC और ST रिजर्वेशन दिया जा सके.
6. परिसीमन आयोग के अधिकार: परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती. तय की गई सीमाओं और सीटों को संसद या राज्य विधानसभाएं बदल नहीं सकतीं, वे केवल इन्हें स्वीकार करती हैं.
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55 साल से परिसीमन नहीं
वर्तमान में लोकसभा की सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दी गई है. दो बार इसे 25-25 साल बढ़ाया गया है. यह समयसीमा 2026 में खत्म हो रही है. इसके बाद होने वाली जनगणना के आधार पर ही सीटों की संख्या में बड़ा बदलाव होने की संभावना है.
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परिसीमन में सीटों का गणित
तमिलनाडु में कितनी सीटें होंगी: तमिलनाडु में 39 सीटें हैं और परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होता है तो उसकी सीटें 49-50 हो सकती हैं. लेकिन सरकार के सभी राज्यों के हिस्से को आनुपातिक रूप से 50% बढ़ाने का फार्मूला दिया है. ऐसे में उसकी 59 सीटें होंगी.
केरल में कितनी सीटें : केरलम में 20 सीटें हैं और 2011 की जनगणना के आधार पर उसकी 23 सीटें होती हैं. लेकिन 50% के फार्मूले के अनुसार वहां 30 सीटें होंगी.आंध्र प्रदेश में 25 सीटें हैं, 2011 की जनगणना के आधार पर वहां 33 सीटें होती हैं. 50% के फार्मूले के अनुसार वहां 37 सीटें होंगी.
ओडिशा में कितनी सीटें: ओडिशा में वर्तमान में 21 सीटें हैं। यदि परिसीमन केवल 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाता, तो केरल में 28 सीटें होतीं। लेकिन भारत सरकार के सभी राज्यों के हिस्से को आनुपातिक रूप से 50% बढ़ाने के फार्मूले के अनुसार, अब तेलंगाना में 31 सीटें होंगी.













