पश्चिम बंगाल SIR मामले में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेश होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति को चुनौती देते हुए एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया है. ⁠पिछले सप्ताह ममता बनर्जी स्वयं अदालत में पेश हुई थीं और एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर दलीलें दी थीं.  

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  • बंगाल की CM ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को चुनौती दी गई है.
  • आवेदन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पेश होना संवैधानिक रूप से अनुचित है.
  • हस्‍तक्षेप आवेदन अखिल भारत हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दाखिल किया है. ⁠
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पश्चिम बंगाल SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) मामले में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के व्‍यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश होने को चुनौती दी गई है. इस मामले में आज सुनवाई होनी है. ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति को चुनौती देते हुए एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया है. ⁠पिछले सप्ताह ममता बनर्जी स्वयं अदालत में पेश हुई थीं और एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर दलीलें दी थीं. यह आवेदन अखिल भारत हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दाखिल किया है. ⁠मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी. 

अर्जी में कहा गया है कि अनुच्छेद 32 के तहत दायर कार्यवाही में किसी पदासीन मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पेश होना संवैधानिक रूप से अनुचित, संस्थागत रूप से अवांछनीय और कानूनी रूप से अस्थिर है. 

न्यायिक परंपराओं और स्थापित प्रथा के विपरीत: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता के अनुसार, एसआईआर से जुड़े मुद्दे व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राज्य शासन और चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों से संबंधित हैं, इसलिए मुख्यमंत्री व्यक्तिगत क्षमता में पेश होने का दावा नहीं कर सकतीं हैं. 

आवेदन में कहा गया है कि राज्य पहले से ही नियुक्त वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से प्रतिनिधित्व कर रहा है. ऐसे में मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति न्यायिक परंपराओं और स्थापित प्रथा के विपरीत है. उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे मामलों को वकीलों के जरिए आगे बढ़ाएं, ताकि संवैधानिक अदालतों की गरिमा, निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनी रहे. 

मुख्‍यमंत्री के पेश होने को लेकर जताई ये आशंका 

साथ ही अर्जी में कहा गया है कि किसी पदासीन मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति से प्रतीकात्मक दबाव या संस्थागत असंतुलन की आशंका पैदा हो सकती है, जो शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को प्रभावित करती है. 

याचिका के सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया है कि मुख्यमंत्री बिना अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के अनुच्छेद 32 के तहत चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर नहीं कर सकतीं हैं. आवेदन में पश्चिम बंगाल में SIR  की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया है. 

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