West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी माहौल के बीच बड़ा बयान देते हुए कहा कि जिन मतदाताओं के नाम न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, उन्हें तृणमूल कांग्रेस की ओर से कानूनी सहायता दी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ऐसे लोगों के लिए वकीलों की व्यवस्था करेगी ताकि वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें.
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बर्दवान जिले के पांडवेश्वर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि किसी भी वोटर के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और पार्टी हर संभव मदद के लिए तैयार है.
60 लाख मामलों में नाम हटने की संभावना
यह बयान भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के बाद आया है. आयोग के मुताबिक न्यायिक जांच के लिए भेजे गए करीब 60 लाख मामलों में से 32 लाख मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इनमें लगभग 40 प्रतिशत मामलों में नाम हटाने की संभावना जताई गई है. हालांकि ऐसे मतदाताओं को पूरी तरह से राहत का मौका भी मिलेगा. उनके लिए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं जहां वे अपने पक्ष में अपील कर सकते हैं.
महिलाओं से आगे आने की अपील
सभा के दौरान ममता बनर्जी ने महिलाओं से खास तौर पर चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा. उन्होंने आगामी चुनाव को ‘कुरुक्षेत्र का महायुद्ध' बताते हुए कहा कि इस लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस पांडवों की भूमिका निभा रही है जबकि भाजपा कौरवों की तरह है.
उन्होंने भाजपा पर चुनावी गड़बड़ी के आरोप भी लगाए और कहा कि विपक्ष किसी भी हद तक जा सकता है. उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो लॉकडाउन जैसे कदम भी अपनाए जा सकते हैं जैसा कोविड-19 के समय हुआ था.
एलपीजी नियमों को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोलते हुए एलपीजी बुकिंग के नियमों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर गैस बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर अनिवार्य किया गया है तो यह आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है. उन्होंने कहा कि अगर किसी का सिलेंडर पहले खत्म हो जाए तो वह क्या करेगा. ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी हर मुद्दे पर जनता के साथ खड़ी है और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी.
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