पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राज्य के मालदा जिले में बुधवार रात को बड़ा बवाल हुआ. वोटर लिस्ट की समीक्षा यानी एसआईआर के काम में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने यहां कई घंटों तक घेरे रखा.मालदा जिले की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर वहां भीड़ काफी उग्र नजर आ रही थी. सैकड़ों लोगों ने कालीचक 2 बीडीओ ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू किया जो देर रात तक जारी रहा. बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में मदद के लिए इन न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है.
अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी पहले तो न्यायिक अधिकारियों के साथ मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली तो वहां शाम को विरोध बढ़ने लगा और फिर पूरे परिसर का घेराव किया गया. उस वक्त ऑफिस के अंदर तीन महिला अधिकारियों समेत सात न्यायिक अधिकारी थे. सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की समीक्षा के काम में चुनाव आयोग और ममता सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच इन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था और उन्हें इस काम में मदद करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
चुनाव आयोग कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा, हमने न्यायिक अधिकारियों का घेराव होने पर तुरंत ही प्रशासन को सूचना दी. जिलाधिकारी और एसपी को तुरंत ही घटनास्थल पर पहुंचने का आदेश दिया गया. डीजीपी से इस घटना को लेकर रिपोर्ट भी तलब की गई है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी बंगाल में उन मतदाताओं के मामलों की जांच कर रहे हैं, जिनके नाम 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूचियों में विचाराधीन के तौर पर चिह्नित किए गए थे, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें सूची में रखा जाए या हटा दिया जाए. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव में मतदान होगा और मतगणना 4 मई को निर्धारित है.














