बंगाल: चुनाव के बीच बेटी की लाश खोजता पिता, फूल और चॉकलेट लेकर समाधि पर गया तो गायब मिला शव

पिता श्यामल डे कभी-कभी श्मशान घाट जाते थे और बच्ची की समाधि पर फूल व चॉकलेट चढ़ाते थे. 3 अप्रैल, 2026 को जब वह फिर से श्मशान घाट गए तो बच्ची की समाधि पूरी तरह से टूटी मिली.

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बंगाल के नादिया में चुनाव के बीच बेटी की लाश खोजता पिता
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पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में लगभग 6 महीने पहले एक बच्ची की मौत हो गई थी, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. लेकिन हाल ही में जब पिता बच्ची की समाधि पर फूल और चॉकलेट लेकर गया तो वह एकदम से सन्न रह गया. बच्ची की समाधि टूटी पाई गई और वहां से बच्ची की लाश भी गायब मिली. माता-पिता अब अपनी बेटी के शव को ढूढ़ने के लिए थाने के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव की वजह से जांच पर असर पड़ रहा है. अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. 

पिछले साल सितंबर में हुई थी बच्ची की मौत

जानकारी के अनुसार, यह घटना चकदाहा के रानीनगर श्मशान घाट पर हुई. चंदुरिया नंबर 1 GP के अंतर्गत मनसापोता गांव निवासी बच्ची के पिता ने पुलिस में लिखित शिकायत दी. जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी 3 वर्षीय बेटी श्रीजनी डे बीमार थी और उसे कोलकाता के SSKM अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 19 सितंबर, 2025 की रात करीब 11 बजे बच्ची की मौत हो गई. इसके बाद 20 सितंबर 2025 को बच्ची को चकदाहा रानीनगर श्मशान घाट में उचित रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. 

बच्ची की समाधि पर फूल और चॉकलेट चढ़ाते थे पिता

इसके बाद पिता श्यामल डे कभी-कभी श्मशान घाट जाते थे और बच्ची की समाधि पर फूल व चॉकलेट चढ़ाते थे. हालांकि, 3 अप्रैल, 2026 को जब वह फिर से श्मशान घाट गए तो बच्ची की समाधि पूरी तरह से टूटी मिली. जिसे देखकर बच्ची के पिता को गहरा सदमा लगा. समाधि पर एक गड्ढा बना हुआ था और बच्ची का शव गायब था.  समाधि में शव को ढकने के लिए इस्तेमाल किया गया तौलिया पास की सड़क पर पड़ा मिला.

समाधि से कैसे गायब हो गया बच्ची का शव

यह सब देखकर श्यामल और उनकी पत्नी पूजा डे हलदार फूट-फूटकर रो पड़े. इसके बाद श्यामल ने चकदाहा पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा, “मैंने शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. मैं और मेरी पत्नी, अपने पूरे परिवार के साथ, डर के साए में जी रहे हैं. मेरी बेटी का शव समाधिक से कैसे गायब हो गया? मैंने अंतिम संस्कार की सभी सही प्रक्रियाओं का पालन किया था और मेरे पास खर्चों की रसीदें भी हैं. श्मशान घाट के कर्मचारी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं. उनकी देखरेख में ऐसा कैसे हो सकता है? मुझे जवाब चाहिए."

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श्यामल की पत्नी पूजा ने कहा कि जब तक मुझे इंसाफ़ नहीं मिल जाता, मैं हार नहीं मानूंगी. किसी ने मेरी बेटी का शव उसकी समाधि से निकाल लिया है. मैं एक मां हूं, इंसाफ़ के लिए कहां जाऊं? ऐसा लगता है कि हर कोई अपनी ही चिंताओं में व्यस्त है. शिकायत अप्रैल में दर्ज की गई थी, लेकिन SI की ड्यूटी और चुनाव से जुड़े कामों की वजह से उन्हें बार-बार इधर-उधर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं. (बिस्वजीत बनर्जी के इनपुट के साथ)

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