- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 20 अप्रैल से 29 अप्रैल तक शराबबंदी लागू की गई है
- शराबबंदी से सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, जिसमें 900 करोड़ कोलकाता में होगा
- राज्य में लगभग 5400 शराब की दुकानें और बार हैं जिनका रोजाना 80 से 90 करोड़ रुपये का कारोबार होता है
बंगाल में विधानसभा चुनाव को देखते हुए शराबबंदी को लेकर आदेश आया है उससे विवाद खड़ा हो गया है. आदेश के अनुसार बंगाल में जहां पहले चरण में मतदान नहीं है वहां भी शराबबंदी कर दी गई है. बंगाल में शराब बेचने और परोसने पर 20 अप्रैल से ही पाबंदी लागू हो गई है, जो 23 अप्रैल तक जारी रहेगी. शराब की दुकानें 24 अप्रैल को खुलेंगी और फिर 25 अप्रैल के शाम 6 बजे से बंद हो जाएगी जो 29 अप्रैल तक बंद रहेगी. मतगणना के दिन यानी 4 मई को भी शराब की दुकानें बंद रहेंगी. यानी अगले 15 दिनों में पश्चिम बंगाल में साढ़े नौ दिन तक शराब बेचने और परोसने पर प्रतिबंध रहेगा.
1400 करोड़ का होगा नुकसान
माना जा रहा है कि इस शराबबंदी से सरकार को 1400 करोड़ का नुकसान होने वाला है. जिसमें से 900 करोड़ तो केवल कोलकाता में ही होगा. पूरे पश्चिम बंगाल में करीब 5400 शराब की दुकानें और बार हैं जहां शराब परोसी जाती है जिनका रोज का करीब 80 से 90 करोड़ का धंधा है. यही नहीं इसका असर रेस्टोरेंट और अन्य खान पान की दुकानों की बिक्री पर भी पड़ेगा. सबसे ज्यादा प्रभावित तो बार और रेस्तरां के मालिक होने वाले हैं.
क्या कह रहे शराब कारोबारी?
शराब से जुड़े एक कारोबारी ने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले से ही शराब की बिक्री पर आंशिक पाबंदी लगा दी थी और कहा गया था कि स्टॉक को आधा कर दिया जाए. फिर ताजा फरमान के जारी होने के पहले प्रशासन ने एक बैठक बुला कर कहा कि इस बार 48 घंटे नहीं 96 घंटे की शराब बेचने और परोसने पर पाबंदी रहेगी. लेकिन जब ऑर्डर आया तो उसमें दोनों चरणों के बारे में यह लिखा गया था. इससे हमारे बिजनेस पर काफी असर पड़ेगा क्योंकि पहले चरण में कोलकाता में चुनाव नहीं हो रहे हैं.
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वहीं तृणमूल कांग्रेस के अरूप चक्रवर्ती का कहना है चुनाव आयोग बीजेपी की एजेंसी की तरह काम कर रही है, अब तो मोटरसाइकिल भी बंद कर दी है. लोगों को कितनी परेशानी होगी. वो लोग चुनाव हार रहे हैं इसलिए ये सब कर रहे हैं. कुल मिलाकर कर बंगाल में चुनाव के दौरान शराबबंदी भी एक चुनावी मुद्दा बन गया है.
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