- रुचिर शर्मा ने कहा कि ममता बनर्जी चुनाव लड़ने में आक्रामक हैं और उनकी ऊर्जा उनकी उम्र के बावजूद प्रभावशाली है
- कोलकाता और बंगाल की संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है, जो आधुनिकता के बावजूद अपनी पहचान बनाए रखती है
- पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद की कभी समृद्ध इतिहास के बावजूद आज यह भारत के सबसे गरीब जिलों में गिना जाता है
एनडीटीवी के खास शो 'वॉक द टॉक' में एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने ग्लोबल इंवेस्टर और लेखक रुचिर शर्मा से बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. टीएमसी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने के तरीके पर रुचिर शर्मा ने कहा कि उन्हें मजबूत और आक्रामक चुनाव लड़ना पसंद है, वो इस उम्र में भी चुनौती पसंद करती हैं. वहीं उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी काफी शांत से दिखने और बोलने वाले हैं. बंगाल में एक नई जेनरेशन राजनीति में अपनी जगह बना रही है.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की उम्र अब 70 साल हो गई है, लेकिन इस उम्र में भी उनकी इनर्जी कमाल की है. हालांकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की रैली में मैंने ज्यादा जोश और उत्साह देखा. तो बंगाल की राजनीति में नई पीढ़ी का उभार देखना अच्छा है.
उन्होंने बताया कि लंदन के रहने वाले एक लेखक ने उस वक्त कहा था कि मुर्शिदाबाद रहने के लिए लंदन से भी अच्छी जगह है. ये उस वक्त की मुर्शिदाबाद की अपनी पहचान थी. और आज लगभग 300 साल बाद देख लीजिए इसकी क्या स्थिति है. ये काफी निराशाजनक है.
रुचिर शर्मा ने कहा कि आज सभी राज्य चुनाव जीतने के लिए विकास से ज्यादा अपनी वेलफेयर स्कीम पर भरोसा करते हैं, जिससे स्टेट कलेक्शन का एक बड़ा हिस्सा इसमें खर्च होता है. इससे राज्यों का नुकसान तो बढ़ता ही है, लंबे समय के विकास के कामों में भी बाधा आ रही है. अब ये वेलफेयर स्कीम एक ट्रेंड सा बन गया है.
उन्होंने कहा कि इसीलिए भारत और चीन के विकास की राह में एक यही बड़ा अंतर है. हमारी नीति अलग है. नेताओं का कहना है कि हमारे वेलफेयर स्कीम ज्यादा जरूरी है, क्योंकि ये सीधे उन जरूरतमंदों तक पहुंचता है, जिसको इसकी जरूरत है. हालांकि इसका प्रभाव दूरगामी हो सकता है. लेकिन फिलहाल यही सच है.
बता दें कि तमिलनाडु में जन्मे रुचिर शर्मा अब अमेरिका में बस चुके हैं. यह उनका भारत का 34वां चुनावी दौरा है. वो हर महीने में एक हफ्ता अलग-अलग देशों में घूमते हैं, जहां वे बड़े नेताओं, सीईओ और दूसरे स्थानीय तौर पर बड़े लोगों से मुलाकात करते हैं. उनके लेख द वॉल स्ट्रीट जरनल, द फाइनेंशियल टाइम्स, द वॉशिंगटन पोस्ट, फॉरेन अफेयर्स, फॉरेन पॉलिसी, ब्लूमबर्ग और द गार्जियन आदि में भी छपते रहे हैं.
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