पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में ऐतिहासिक वोटिंग आखिर कहती क्या है?

तमिलनाडु में भी ऐसा ही कुछ हुआ है. 2001 विधानसभा में 59.1 प्रतिशत मतदान हुआ. 2011 में 78.0 प्रतिशत मतदान हुआ. 2021 में 72.7 प्रतिशत मतदान हुआ. अब 2026 में 85.1 प्रतिशत मतदान हुआ है.

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विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे.
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  • पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इस बार अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ है
  • पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ
  • ममता बनर्जी और पीएम मोदी ने बंगाल में जीत का दावा किया है
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण और तमिलनाडु चुनाव में ऐतिहासिक वोटिंग हुई है. पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को है. रिजल्ट 4 मई को आएंगे. पर ये बंपर वोटिंग कहता क्या है? क्या संकेत दे रहा है? क्या भारत की चुनावी प्रक्रिया में ये नया बदलाव है? कभी 50-55 प्रतिशत वोटिंग में सरकारें बन जाया करती थीं और आज पश्चिम बंगाल में 92 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. आखिर वजह क्या है? क्या लोग वोट के प्रति ज्यादा जागरूक हो गए हैं या वजह कुछ और है?

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया. निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के प्रत्येक मतदाता को सलाम करता है.”

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जब-जब पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक मतदान हुआ

  1. पश्चिम बंगाल में 2001 विधानसभा चुनाव में 75.3 प्रतिशत मतदान हुआ था. 2001 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 199 सीटों वाली लेफ्ट फ्रंट की सरकार बनी थी. ये उसकी लगातार छठी बार जीत थी. लेफ्ट फ्रंट में CPI(M) 143 सीटें, फॉरवर्ड ब्लॉक को 25 सीटें, RSP को 17 सीटें, CPI को 7 सीटें और बाकी सहयोगियों को 7 सीटें मिली थीं. वहीं विपक्ष को कुल 86 सीटें मिलीं. तृणमूल कांग्रेस (TMC)को 60 सीटें, कांग्रेस को 26 सीटें, GNLF को 3 सीटें और अन्य/निर्दलीय को 6 सीटें मिलीं थीं. तब बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने थे, जिन्होंने ज्योति बसु के बाद कमान संभाली थी.
  2. फिर 2011 में 84.3 प्रतिशत हुआ. 2011 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार बनी थी. ये लेफ्ट फ्रंट के 34 साल के शासन का अंत था. सरकार UPA की बनी थी और उसने कुल 226 सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस (AITC) को 184 सीटें, कांग्रेस को 42 सीटें मिलीं. वहीं विपक्ष में लेफ्ट फ्रंट को 62 सीटें मिलीं थीं. CPI(M)को 40 सीटें, फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) को 11 सीटें, RSP को 7 सीटें, CPI को 2 सीटें, SP को 1 सीट, DSP को 1 सीट मिली. वहीं अन्य में GJM को 3 सीटें, निर्दलीय + अन्य को 2 सीटें मिलीं. ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनीं. लेफ्ट फ्रंट को 136 सीटों का नुकसान हुआ था.
  3. 2016 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई. ममता बनर्जी फिर मुख्यमंत्री बनीं. TMC को कुल 211 सीटें आईं और 44.91% वोट शेयर रहा. विपक्ष को कुल 77 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 44 सीटें, CPI(M) को 26 सीटें, BJP को 3 सीटें, GJM को 3 सीटें, अन्य लेफ्ट फ्रंट सहयोगी को 4 सीटें मिलीं. कुल मतदान  83.02% हुआ. इस चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने मिलकर "महाजोत" गठबंधन बनाया था, जिसे कुल 74 सीटें मिलीं.
  4. 2021 में 81.6 प्रतिशत मतदान हुआ. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई. ममता बनर्जी फिर मुख्यमंत्री बनीं. TMC को कुल 215 सीटें मिलीं और 48.02% वोट शेयर मिला. विपक्ष को कुल 78 सीटें मिलीं. BJP को 77 सीटें और राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी (ISF) को 1 सीट मिली. कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट को एक भी सीट नहीं मिली. ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं, लेकिन बाद में भवानीपुर उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी रहीं.
  5. 2026 में 92.6 प्रतिशत मतदान पहले चरण में हुआ है. जाहिर है ज्यादा मतदान का मतलब सरकार बदलना ही नहीं होता, पर इतना ज्यादा मतदान जरूर इशारा करता है कि वोटर ने मन बनाकर वोट किया है. 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अब तक हुए मतदान से संकेत मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस अभी से ही जीत की स्थिति में है. कोलकाता के बो बाजार इलाके में आयोजित रैली में ममता ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद वह सभी विपक्षी दलों को साथ लेकर दिल्ली (केंद्र की सत्ता) पर विजय हासिल करेंगी. ममता ने कहा, “मैं लोगों के मन को जितना समझ पाई हूं और अभी तक हुए मतदान के आधार पर मैं यह कह सकती हूं कि हम अभी से ही जीत की स्थिति में हैं. मुझे किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे कुर्सी नहीं चाहिए। मैं सिर्फ दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार का अंत चाहती हूं.”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बड़ी संख्या में वोट देने के लिए राज्य की जनता को बधाई दी और मतदान के अब तक के आंकड़ों को ‘‘परिवर्तन के लिए शानदार जनादेश'' का संकेत बताया. प्रधानमंत्री मोदी ने नदिया जिले के कृष्णानगर में एक चुनावी रैली में कहा कि निर्वाचन आयोग इस बात के लिए बधाई का पात्र है कि उसने चुनाव में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं होने दी. पीएम मोदी ने कहा, ‘‘बंगाल में पिछले 50 वर्षों के चुनावी इतिहास में यह पहली बार है कि हिंसा की घटनाएं न्यूनतम रहीं। मतदान के बारे में अब तक मुझे जो जानकारी मिली है, उससे मुझे पूरा विश्वास है कि यह बंगाल के मतदाताओं द्वारा बदलाव के पक्ष में एक शानदार जनादेश होगा.''

तमिलनाडु चुनाव का गणित समझिए

तमिलनाडु में भी ऐसा ही कुछ हुआ है. 2001 विधानसभा में 59.1 प्रतिशत मतदान हुआ. 2011 में 78.0 प्रतिशत मतदान हुआ. 2021 में 72.7 प्रतिशत मतदान हुआ. 2001 में AIADMK गठबंधन की सरकार बनी. मुख्यमंत्री जे. जयललिता और फिर ओ. पन्नीरसेल्वम बने. AIADMK गठबंधन को 196 सीटें मिलीं. अकेले AIADMK को 132 सीटें मिलीं. फिर 2011 चुनाव में भी AIADMK की सरकार बनी. मुख्यमंत्री जे. जयललिता बनीं. AIADMK गठबंधन ने बहुमत हासिल किया. 2016 में भी AIADMK 136 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी. 2021 में  DMK गठबंधन (SPA) की सरकार बनी. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन. DMK गठबंधन को 159 सीटें मिलीं. अकेले DMK को 133 सीटें मिलीं. AIADMK का 10 साल का शासन खत्म हुआ. अब 2026 में 85.1 प्रतिशत मतदान हुआ है. ये आंकड़े भी बताते हैं कि जरूरी नहीं कि ज्यादा मतदान का मतलब सरकार बदल रही हैं. हां, चांसेज इसी के ज्यादा होते हैं. 

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि तमिलनाडु इस विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेगा.मुख्यमंत्री ने एसआईईटी कॉलेज मतदान केंद्र पर अपनी पत्नी दुर्गा स्टालिन और अपने बेटे तथा उपमुख्यमंत्री उदयनिधि के साथ वोट डाला. मतदान के बाद उन्होंने कहा, ‘‘तमिलनाडु जीतेगा.'' ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने उस अक्सर दोहराए जाने वाले बयान की ओर इशारा कर रहे थे, जिसमें उन्होंने मौजूदा चुनावी मुकाबले को ‘‘तमिलनाडु टीम बनाम दिल्ली टीम'' की लड़ाई बताया था. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपना वोट डाल दिया है. इसी तरह तमिलनाडु के सभी लोगों को भी बिना चूके अपना लोकतांत्रिक कर्तव्य निभाना चाहिए. तमिलनाडु जीतेगा.''

तो फिर आंकड़े क्या कह रहे?

ये आंकड़े सरकार बनने या बदलने से ज्यादा इस बात का संकेत दे रहे हैं कि भारत के चुनावी प्रक्रिया में समय के साथ तेजी के साथ सुधार हो रहा है. कभी 50-55 फीसदी मतदान को अच्छा मतदान माना जाता था, लेकिन अब 90 फीसदी से भी ज्यादा मतदान हो रहा है. SIR के जरिए चुनाव आयोग ने मर चुके वोटरों, एक ही वोटर के कई राज्यों में बने वोटर कार्ड और दूसरे देशों से आकर फर्जी तरीके से वोटर कार्ड बनवाने पर नकेल कस दी. नतीजा ये हुआ कि जो जहां रह रहा है, उसका वोटर कार्ड अब वहीं का है. यही कारण है कि मतदान का परसेंटेज अब बढ़ा हुआ नजर आ रहा है.

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