Waqf Bill: वक्फ अमेंडमेंट बिल 2025 लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी पास हो गया है. राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 वोट पड़े. वहीं विपक्ष में 95 सदस्यों ने वोट किया. लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 वोट और विरोध में 232 वोट पड़े. 2 अप्रैल को लोकसभा में बिल पर दिनभर चर्चा हुई और रात 12 बजे के बाद वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई. करीब रात 2 बजे बिल लोकसभा में पास हुआ.
लोकसभा का गणित
लोकसभा में बिल को पारित करने के लिए कम से कम 272 वोटों की जरूरत थी. भाजपा के सांसदों की संख्या 240 है. उनके सहयोगियों JDU के 12 सांसद हैं, TDP के 16 सांसद, LJP के 5 सांसद, RLD के 2 सांसद और शिवसेना के 7 सांसदों को जोड़ दें तो ये संख्या 282 हो जाती है. जेडीएस, अपना दल आदि सहयोगियों को जोड़कर संख्या 288 तक पहुंच गई और लोकसभा में बिल पास हो गया. मतलब बीजेपी के एजेंडे वाले बिल को सभी सहयोगी दलों ने जोरदार समर्थन किया.
राज्यसभा का गणित
इसी तरह राज्यसभा में बीजेपी के 98, जदयू के 4, एनसीपी के 3, टीडीपी के 2. जेडीएस के 1, शिवसेना का 1, रालोद का 1 सहित कुल एनडीए के 119 सांसद हैं. बिल पास कराने के लिए इतने ही जरूरी थे. मगर बिल के पक्ष में पड़े 128 वोट. इसमें 7 मनोनीत सांसदों के वोट भी शामिल हो गए. राज्यसभा में 3 अप्रैल को दिनभर चर्चा के बाद रात 2 बजकर 32 मिनट पर बिल पास हो गया.
वक्फ के साथ बीजेपी कैसे हुई पास
अब इस सवाल का जवाब भी जान लीजिए. 2024 के लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी बहुमत के आंकड़े 272 से पीछे 240 पर रुक गई तो सरकार के भविष्य को लेकर तमाम तरह के दावे किए जाने लगे. नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को लेकर कहा जाने लगा कि अब इन दोनों की बार्गेनिंग पॉवर काफी बढ़ जाएगी और मोदी सरकार अब अपने मूल एजेंडे से भटक जाएगी. सरकार का सारा ध्यान जदयू और टीडीपी को मैनेज करने में ही लगा रहेगा और अगर एक ने पाला बदला तो सरकार खतरे में आ जाएगी. नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो विपक्ष ने संसद से लेकर सड़क तक माहौल बनाया कि सरकार अल्पमत में है.
लोकसभा चुनाव का खुमार विपक्ष के सिर चढ़कर बोल रहा था. जनता के मूड का पहली बार पता लगा हरियाणा के विधानसभा चुनाव में. यहां कांग्रेस ये मानकर चल रही थी कि सरकार तो वही बनाने जा रही है. मगर, रिजल्ट आया तो बीजेपी ने लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बना ली. फिर महाराष्ट्र का चुनाव हुआ तो फिर विपक्ष को लगा कि महाराष्ट्र में तो उनकी ही सरकार बनेगी, मगर फिर बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब हो गई. इस बीच झारखंड और जम्मू कश्मीर में विपक्ष को जरूर जीत मिली, मगर ये विपक्ष की कम और हेमंत सोरेन और उमर अब्दुल्ला की जीत ज्यादा साबित हुई. रही-सही कसर दिल्ली के जनादेश ने पूरी कर दी. अजेय समझे जाने वाले अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में ही हार का सामना करना पड़ा और 27 सालों बाद यहां भी बीजेपी की सरकार बन गई. मगर फिर भी केंद्र सरकार को लेकर आशंकाएं समाप्त नहीं हुईं थीं. वक्फ बिल को जेपीसी में भेजे जाने से ये लगने लगा कि बीजेपी अपने एजेंडे से पीछे हट रही है. मगर यहीं बीजेपी ने सभी को चकमा दे दिया.
कैसे बीजेपी ने वक्फ पर सहयोगियों को साधा
बीजेपी ने जेपीसी में वक्फ बिल को भेजने का फैसला अपने सहयोगियों जेडीयू और टीडीपी के कहने पर किया था. इसका मकसद ये था कि मुसलमानों को ये मैसेज जाए कि इन दलों की राय को महत्व दिया जा रहा है. इसके बाद इन दोनों सहयोगियों के लाए संशोधनों को भी पास किया गया. वहीं विपक्ष सिर्फ बिल का विरोध करता रहा. इस तरह से बीजेपी ने मुसलमानों को भी संदेश दे दिया कि वो उनके समर्थन पाए अपने सहयोगियों की बातों को गंभीरता से ले रही है, वहीं ये भी साबित किया कि ये बिल मुसलमानों के पक्ष में है. राज्यसभा और लोकसभा में बिल पास कराने से ज्यादा वोट पाकर बीजेपी ने ये भी साबित कर दिया कि सरकार बीजेपी ही चला रही है और गंभीर मुद्दों पर पार्टी किसी से कोई समझौता नहीं करने जा रही है. इस बिल से अब आगे और भी महत्वपूर्ण बिल पास हो सकेंगे. इससे दुनिया में भी भारत सरकार की साख बढ़ेगी.
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