What Is Waqf: 800 साल पहले वोट पॉलिटिक्स से भारत में कैसे शुरू हुआ वक्फ!

वक्फ का अवधारणा इस्लाम के प्रारंभिक दौर में शुरू हुई. इसे धार्मिक और सामाजिक प्रयोजनों के लिए संपत्तियों को समर्पित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया. समय के साथ, वक्फ संस्थाएं बनीं, जिनका उद्देश्य समुदाय की भलाई को बढ़ावा देना था.

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इस्लाम के भारत में आने के बाद वक्फ की प्रथा शुरू होने की बात कही जा सकती है. लेकिन इसका इतिहास थोड़ा अस्पष्ट है. यह स्पष्ट नहीं है कि वक्फ की  सही शुरुआत कब हुई और इसे लागू करने वाला पहला शासक कौन था. यह सवाल ऐसा है जैसे कि यह जानने की कोशिश करना कि 'दान की परंपरा कैसे शुरू हुई.' इसका सही समय और तरीके के बारे में जानकारी ढूंढना थोड़ा मुश्किल है. वक्फ एक धार्मिक और सामाजिक परंपरा है, जहां व्यक्ति अपनी संपत्ति को किसी नेक काम के लिए समर्पित करता है, जैसे स्कूल, अस्पताल या मस्जिद बनाने के लिए.

केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लोकसभा में पेश करने का फैसला किया है, जो 2 अप्रैल यानि आज को पेश हुआ है. यह बिल पहले  संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को संसद में रखा गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया था.

संसदीय समिति में कुल 44 संशोधन पेश किए गए हैं, जिनमें से 14 संशोधन जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली समिति ने स्वीकार कर लिए हैं. इस बिल को पहले ही कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे आज पेश किया गया है. बिल के संबंध में कुछ जरूरी सवाल हैं, जो वक्फ से जुड़े हैं और इसके इतिहास को समझने में मदद कर सकते हैं. 

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वक्फ क्या है?

वक्फ एक इस्लामी कानूनी अवधारणा है, जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धार्मिक या सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करता है. इस संपत्ति की आय का उपयोग जरूरतमंदों, शिक्षा, और अन्य सामाजिक सेवाओं के लिए किया जाता है. वक्फ एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है किसी चीज को रोकना या संरक्षित करना. इस्लाम में वक्फ का मतलब है ऐसी संपत्ति का दान करना, जो समाज के भले के लिए इस्तेमाल हो सके. जैसे, कोई व्यक्ति अपने पैसे, घर, खेत, या कोई भी चीज, जैसे पंखा, कूलर, साइकिल, या टीवी, जन कल्याण के लिए दान कर सकता है. इस प्रकार की संपत्ति को वक्फ कहा जाता है, और इसका उद्देश्य समाज की मदद करना है.

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वक्फ का इतिहास क्या है?

वक्फ का अवधारणा इस्लाम के प्रारंभिक दौर में शुरू हुई. इसे धार्मिक और सामाजिक प्रयोजनों के लिए संपत्तियों को समर्पित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया. समय के साथ, वक्फ संस्थाएं बनीं, जिनका उद्देश्य समुदाय की भलाई को बढ़ावा देना था. एक कहानी और प्रचलित है कि एक बार खलीफा उमर ने खैबर में एक जमीन खरीदी. उन्होंने पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा कि इस जमीन का सबसे अच्छा उपयोग कैसे किया जा सकता है. पैगंबर ने उन्हें सलाह दी कि इस जमीन को रोक लेना चाहिए. इसे बेचने, उपहार में देने या विरासत में देने के बजाय, इसके फायदे को लोगों की जरूरतों पर खर्च करना चाहिए. इस तरीके से उस जमीन को 'वक्फ' कर दिया गया, जिसका मतलब है कि उस जमीन से होने वाले लाभ सभी लोगों के लिए उपयोगी होंगे.

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भारत में वक्फ की स्थिति क्या है?

भारत में वक्फ की स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा है. वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत के वक्फ अधिनियम के तहत किया जाता है, जो वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और उनके सदुपयोग की दिशा में सहायक है.

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वक्फ संशोधन बिल का महत्व क्या है?

वक्फ संशोधन बिल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना, वक्फ बोर्डों के कार्यों में सुधार करना और वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को हल करना है. इस बिल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके उपयोग में सुधार की उम्मीद है.

जेपीसी (JPC) की भूमिका क्या है?

जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) का गठन विशेष मुद्दों पर विचार-विमर्श और संशोधनों की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए किया जाता है. इसकी भूमिका वक्फ बिल पर सुझाव और संशोधन देना है, जिससे बिल को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाया जा सके.

मोहम्मद गौरी से क्या है कनेक्शन?

वक्फ की संपत्ति की शुरुआत दो गांवों के दान से हुई थी, जो मोहम्मद गोरी से जुड़ी हुई है. 12वीं शताब्दी के अंत में जब मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया, तो उसने अपनी शक्ति को मजबूत करने के लिए मुसलमानों की शिक्षा और इबादत के लिए कदम उठाए. उसने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान किए और इसे भारत में वक्फ का एक शुरुआती उदाहरण माना जाता है. ऐसे ही आपको बता दें कि भारत में दिल्ली सल्तनत की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक से हुई, जो 1206 से 1210 तक शासन करते थे. उन्हें इस्लामी शासन की शुरुआत करने वाला पहला शासक माना जाता है. उनके बाद इल्तुतमिश (1211-1236) जैसे शासकों ने मस्जिदों, मदरसों और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए संपत्तियों को दान देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. इसे वक्फ का प्रारंभिक रूप माना जा सकता है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वक्फ को लागू करने वाला पहला शासक कौन था, लेकिन इल्तुतमिश के समय इस्लामी कानूनों को व्यवस्थित करने का काम शुरू हुआ, जिसमें वक्फ भी शामिल था.

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