वैभव सूर्यवंशी बिहार के दूसरे खिलाड़ी, बिहार के लिए खेलते हुए पहुंचे टीम इंडिया

वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि इसलिए और खास मानी जा रही है क्योंकि वे ऐसे समय में सामने आए हैं जब बिहार क्रिकेट लगातार संघर्ष के बाद अपनी पहचान दोबारा बना रहा है.

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Vaibhav Suryavanshi (Insta)

वैभव सूर्यवंशी का भारतीय टीम में चयन बिहार के लिए गर्व और खुशी का बड़ा मौका है. अगर वैभव भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करते हैं, तो वे वर्तमान बिहार में जन्मे और बिहार से खेलते हुए टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले दूसरे क्रिकेटर बन जाएंगे. यही वजह है कि उनके चयन को बिहार क्रिकेट के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. बहुत कम लोगों को पता है कि आज तक यह उपलब्धि हासिल करने वाले एकमात्र क्रिकेटर सुभ्रोतो बनर्जी रहे हैं. पटना में जन्मे सुभ्रोतो बनर्जी ने 1991-92 में भारत के लिए एक टेस्ट और छह एकदिवसीय मैच खेले थे. वे 1992 विश्व कप में भारतीय टीम का भी हिस्सा थे. उस समय बिहार की रणजी टीम देश की मजबूत टीमों में गिनी जाती थी और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी यहां से निकल रहे थे. लेकिन सुभ्रोतो बनर्जी के बाद बिहार का कोई खिलाड़ी भारतीय टीम तक नहीं पहुंच पाया.

दिलचस्प बात यह है कि बिहार का भारतीय क्रिकेट में योगदान इससे कहीं अधिक रहा है. 1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद का बिहार से गहरा संबंध रहा है. उनके पिता भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे. हालांकि कीर्ति आजाद ने घरेलू क्रिकेट दिल्ली से खेला और वहीं से भारतीय टीम में जगह बनाई, लेकिन बिहार के लोग उन्हें हमेशा अपने गौरव के रूप में देखते हैं. विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम में बिहार से जुड़ा एक खिलाड़ी होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.

बिहार से नाता रखने वाले कई खिलाड़ी

इसके अलावा कई बड़े क्रिकेटरों का संबंध भी कभी न कभी बिहार से रहा है. महेंद्र सिंह धोनी, वरुण आरोन, शाहबाज नदीम और इशान किशन जैसे खिलाड़ी उस भूभाग से आते हैं जो कभी अविभाजित बिहार का हिस्सा था. हालांकि झारखंड बनने के बाद इन खिलाड़ियों ने झारखंड से क्रिकेट खेलते हुए भारतीय टीम में जगह बनाई. इसलिए उन्हें बिहार क्रिकेट व्यवस्था से निकलकर टीम इंडिया तक पहुंचने वाला खिलाड़ी नहीं माना जाता. 

बिहार की रणजी टीम के लिए खेलने वाले कई प्रसिद्ध खिलाड़ियों का जन्म भी बिहार के बाहर हुआ था. इनमें रमेश सक्सेना, हरि गिडवानी और दलजीत सिंह जैसे नाम शामिल हैं. वहीं पूर्व भारतीय विकेटकीपर साबा करीम का नाम भी बिहार क्रिकेट के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है.

पटना से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और बाद में भारतीय टीम के लिए भी खेले. हालांकि उनके क्रिकेट करियर का बड़ा हिस्सा बंगाल से जुड़ा रहा.

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क्यों खास है वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि

वैभव सूर्यवंशी की उपलब्धि इसलिए और खास मानी जा रही है क्योंकि वे ऐसे समय में सामने आए हैं जब बिहार क्रिकेट लगातार संघर्ष के बाद अपनी पहचान दोबारा बना रहा है. राज्य विभाजन के बाद बिहार क्रिकेट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. लंबे समय तक प्रशासनिक विवाद, बुनियादी सुविधाओं की कमी और BCCI की मान्यता से जुड़े विवादों ने बिहार क्रिकेट को पीछे धकेल दिया. इसके बावजूद राज्य के युवा खिलाड़ियों ने मेहनत करना नहीं छोड़ा.

समस्तीपुर के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा से पूरे देश का ध्यान खींचा है. जूनियर क्रिकेट से लेकर बड़े मंच तक उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. उनकी सफलता यह साबित करती है कि बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. जरूरत केवल सही अवसर और बेहतर व्यवस्था की है.

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वैभव ही नहीं बिहार के हजारों युवाओं की सफलता

वैभव का भारतीय टीम तक पहुंचना केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है. यह बिहार के हजारों युवा क्रिकेटरों के लिए उम्मीद की नई किरण है. इससे यह संदेश जाएगा कि बिहार के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं. आने वाले समय में इससे राज्य में क्रिकेट के प्रति उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है.

अगर वैभव भारतीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरते हैं, तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी का डेब्यू नहीं होगा. यह सुभ्रोतो बनर्जी के बाद करीब 34 साल लंबे इंतजार का अंत होगा. साथ ही यह उस राज्य के लिए गर्व का क्षण होगा जिसने कीर्ति आजाद जैसे विश्व कप विजेता, सुभ्रोतो बनर्जी जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को देश को दिया है.

बिहार के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह सिर्फ एक चयन नहीं, बल्कि इतिहास रचने जैसा पल होगा. वैभव सूर्यवंशी का संभावित पदार्पण यह साबित करेगा कि बिहार क्रिकेट अब एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की ओर बढ़ रहा है.

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