वाकई किल्लत या सिर्फ पैनिक बुकिंग! ईरान जंग शुरू होने के बाद LPG की मांग 60% बढ़ी

LPG Shortage: ईरान युद्ध के कारण देश में LPG का संकट बढ़ रहा है. लोग LPG सिलेंडर भरवाने के लिए लाइनों में खड़े हैं. पैनिक बाइंग बहुत हो रही है.

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  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है, जिससे विश्व के 20 प्रतिशत कच्चे तेल का मार्ग प्रभावित हुआ है
  • भारत के दो जहाजों शिवालिक और नंदा देवी को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति मिली है, जो LPG ला रहे हैं
  • युद्ध के कारण LPG की किल्लत की खबरें बढ़ी हैं, जिससे उपभोक्ताओं में पैनिक बुकिंग में तेजी आई है
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नई दिल्ली:

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो जंग चल रही है, उसका असर तेल और गैस पर पड़ता दिखने लगा है. वह इसलिए क्योंकि ईरान ने उस होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है. हालांकि, अच्छी बात ये है कि भारत के दो जहाज- 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की इजाजत मिल गई है. दोनों LPG लेकर आ रहे हैं और सोमवार-मंगलवार तक ये पहुंच सकते हैं.

मिडिल ईस्ट में संकट के कारण देश के कई हिस्सों में LPG की किल्लत की खबरें आ रही हैं. लोग सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों के बाहर उन्हें रिफिल करवाने के लिए खड़े हुए हैं. वहीं, सरकार का दावा है कि LPG की कोई कमी नहीं है.

लेकिन पैनिक बुकिंग क्यों हो रही?

पिछले कुछ दिन से LPG की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. इसके बाद पैनिक बाइंग शुरू हो गई है. लोग घबराहट में LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं. डर है कि अगर ईरान युद्ध लंबा खिंचा तो LPG की कमी हो सकती है. इसलिए लोग पहले से ही सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं. 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और उनके लिए LPG सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.

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हालांकि, घबराहट और डर में की जा रही पैनिक बाइंग के कारण LPG रिफिल बुकिंग में भारी उछाल आया है. सरकार के मुताबिक, युद्ध से पहले हर दिन औसतन 55.7 लाख बुकिंग होती थी. गुरुवार को यह बढ़कर 75.7 लाख पर पहुंच गई. जबकि शुक्रवार को 88.8 लाख बुकिंग हुई. यानी, युद्ध शुरू होने के बाद LPG सिलेंडर की बुकिंग लगभग 60 फीसदी बढ़ गई है.

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कितनी गैस सप्लाई हो रही है?

अभी भी उतनी ही गैस सप्लाई हो रही है, जितनी पहले होती थी. फर्क बस इतना है कि अब पैनिक बाइंग बढ़ गई है.

सुजाता शर्मा ने बताया कि युद्ध से पहले हर दिन 55 लाख बुकिंग होती थी और तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करती थीं. सिलेंडर की डिलीवरी अभी भी उतनी ही है, जबकि बुकिंग में काफी बढ़ोतरी हुई है.

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इसके लिए सरकार क्या कर रही?

पैनिक बुकिंग कम करने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं. सरकार ने शहरी इलाकों में डिलीवरी और बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर कर दिया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अंतर 45 दिनों का है. अगर कोई इस समयसीमा के भीतर बुकिंग करने की कोशिश करता है तो बुकिंग नहीं होगी.

सरकार ने तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से यह भी कहा है कि वे LPG रिफिल की डिजिटल बुकिंग को बढ़ावा देने और पैनिक बाइंग को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने का एक अभियान शुरू करें. उपभोक्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर जाने के बजाय, रिफिल बुकिंग के लिए SMS, WhatsApp और OMCs के मोबाइल ऐप्स जैसे डिजिटल साधनों का इस्तेमाल करें.

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सुजाता शर्मा ने कहा, 'बुकिंग या सिलेंडर की डिलीवरी के लिए डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर कतारों में खड़े होने की कोई जरूरत नहीं है. OMCs उपभोक्ताओं के घरों तक सिलेंडर पहुंचाती हैं और आगे भी ऐसा करती रहेंगी.' उन्होंने आगे कहा कि हालांकि स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है, लेकिन LPG सिलेंडर उपलब्ध हैं और आपूर्ति जारी है.

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ऐसी दिक्कत क्यों आ रही?

यह दिक्कत इसलिए आ रही है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए तेल और गैस के आयात पर निर्भर है. कच्चे तेल की जरूरत का 88%, प्राकृतिक गैस की जरूरत का 50% और LPG की मांग का 60% आयात होता है.

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले भारत की जरूरत का 30% कच्चा तेल और 85-90% LPG मिडिल-ईस्ट आती थी. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है. रूस समेत दूसरे देशों से कच्चा तेल मिल जा रहा है लेकिन LPG का कोई विकल्प अभी नहीं है.

हालांकि, LPG की इस कमी को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से LPG का घरेलू उत्पादन 31% तक बढ़ाया जा चुका है.

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