- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में मिडिल ईस्ट जंग पर भारत की एकमत और एकजुट आवाज की आवश्यकता पर जोर दिया
- कूटनीति ही युद्ध का समाधान है और भारत सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित कर रहा है- पीएम मोदी
- मैंने पश्चिम एशिया के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात कर तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया- PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 23 मार्च को मिडिल ईस्ट में जारी जंग के मौजूदा हालात पर लोकसभा को संबोधित किया. पीएम मोदी ने यहां साफ कहा कि ये आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए. ईरान के खिलाफ पिछले 24 दिन से जारी अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू की जंग पर भारत के स्टैंड को एकबार फिर सामने रखा और कहा कि बातचीत और कूटनीति ही समस्या का समाधान है. पीएम मोदी ने कहा कि यह युद्ध मानवता के हित में नहीं है. भारत सभी पक्षों को शांतिपूर्वक युद्ध समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
पीएम मोदी ने लोकसभा को बताया, "कूटनीति में भारत की भूमिका स्पष्ट है. हमने शुरू से ही इस संघर्ष के बारे में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है. मैंने पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात की है. मैंने सभी से तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने का आग्रह किया है. भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की है. वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को अवरुद्ध करना अस्वीकार्य है. भारत इस युद्ध जैसे माहौल में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति के जरिए लगातार प्रयास कर रहा है."
पीएम मोदी ने आगे कहा, "भारत ने हमेशा मानवता के कल्याण और शांति की वकालत की है. मैं दोहराता हूं कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है. हमारे सभी प्रयासों का उद्देश्य तनाव कम करना और इस संघर्ष को समाप्त करना है. इस युद्ध में किसी की जान खतरे में डालना मानवता के हित में नहीं है. इसलिए, भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है. जब ऐसे संकट आते हैं तो कुछ तत्व उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. इसलिए सभी कानून व्यवस्था एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो, या रणनीतिक प्रतिष्ठान हों..."
इससे एक दिन पहले अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक उपायों पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की थी.
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