यूपी इलेक्शन से पहले अखिलेश का I-PAC वाला दांव, एजेंसी इन नेताओं को पहले जिता चुकी है चुनाव

पिछले 9 साल से यूपी की सत्ता से दूर समाजवादी पार्टी ने इस बार वापसी के लिए प्रोफेशनल चुनावी रणनीतिकारों पर दांव लगाया है और सियासी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी हैं.

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  • यूपी चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए आईपैक कंपनी को जिम्मेदारी दी है
  • कंपनी ने उन सीटों पर विश्लेषण शुरू कर दिया है, जहां पिछले चुनावों में सपा बहुत कम मार्जिन से हार गई थी
  • अखिलेश यादव ने इलेक्शन मैनजमेंट के लिए आईपैक के साथ-साथ शोटाइम को भी जिम्मेदारी सौंपी है
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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन अधिकतर राजनीतिक दलों ने अभी से कमर कस ली है. बंद कमरों में रणनीतियां बनाई जाने लगी हैं. आंकड़ों और नक्शों के आधार पर सियासी बढ़त का खाका खींचा जा रहा है. समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं है. अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देने के लिए इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनी आईपैक (I-PAC) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

पिछले 9 साल से यूपी की सत्ता से दूर समाजवादी पार्टी ने इस बार वापसी के लिए प्रोफेशनल चुनावी रणनीतिकारों पर दांव लगाया है और सियासी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी हैं. बताया जा रहा है कि आईपैक की एक छोटी टीम ने लखनऊ में अपना काम शुरू भी कर दिया है. 

गौरतलब है कि आईपैक वही कंपनी है, जो कभी चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) से जुड़ी रही थी. हालांकि अब उनकी राहें अलग हो चुकी हैं और पीके अब अपनी जन सुराज पार्टी बनाकर राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं. आईपैक की वेबसाइट के मुताबिक, अब प्रतीक जैन, ऋषि राज सिंह और विनेश चंदेल इसके डायरेक्टर हैं. 

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बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने आईपैक को मुख्य रूप से इलेक्शन मैनेजमेंट और डेटा एनालिसिस की जिम्मेदारी सौंपी है. आईपैक की टीम फिलहाल उन सीटों पर विश्लेषण कर रही है, जहां पिछले चुनावों में सपा को बहुत कम मार्जिन से हार का सामना करना पड़ा था. इन सीटों पर हार की वजहों का बारीकी से एनालिसिस किया जा रहा है ताकि गलतियों को सुधारा जा सके.

किसी भी चुनाव को जीतने के लिए प्रत्याशियों का सही चयन और सटीक जातीय समीकरण सबसे अहम होता है. आईपैक ने उम्मीदवारों के चयन और जाति के गणित पर काम शुरू कर दिया है. जमीन पर उतरकर सर्वे किए जा रहे हैं. कंपनी जल्द ही पूरा लेखा-जोखा की रिपोर्ट तैयार करके पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी. इससे सपा को अपनी रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है.

दिलचस्प तथ्य ये है कि अखिलेश यादव ने सिर्फ एक कंपनी पर दांव लगाने के बजाय दूसरी एजेंसियों को भी चुनावी रणनीति का काम दिया है. खबर है कि आईपैक के अलावा शोटाइम भी सपा के चुनाव मैनेजमेंट से जुड़ा काम देख रही है. इसकी वजह यही लगती है कि अखिलेश इस बार कोई मौका छोड़ने के मूड में नहीं हैं और उन्होंने मन बना लिया है कि पिछली बार की गलतियां इस बार दोहरानी नहीं हैं. 

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आईपैक दावा करती है कि उसने देश में कई पार्टियों को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. कंपनी ने जिन नेताओं की पार्टियों की चुनावी कमान संभाली थी, उनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, जगनमोहन रेड्डी, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, राहुल गांधी, अमरिंदर सिंह, नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी शामिल हैं. 

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