सरासर गलत फैसला... केंद्रीय मंत्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, पढ़ें क्या कुछ कहा

कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने इसे गलत फैसला भी बताया है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा. 

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
इलाहाबाद हाईकोर्ट पर केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति
नई दिल्ली:

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हाल के एक फैसले की कड़े शब्दों निंदा की है. इस फैसले में कहा गया था कि किसी महिला गलत तरीके से पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप नहीं माना जाएगा, बल्कि यह निर्वस्त्र करने के इरादे से किया गया हमला माना जाएगा. कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने इसे गलत फैसला भी बताया है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने यह बयान न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा द्वारा जारी आदेश के जवाब में आया है, जिन्होंने दो व्यक्तियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. बलात्कार के आरोप में उन्हें सम्मन भेजने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी.

कोर्ट के इस फैसले पर DCW की पूर्व प्रमुख और आप सांसद स्वाति मालीवाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने एनडीटीवी से कहा कि ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण. मैं फैसले में की गई टिप्पणियों से बहुत स्तब्ध हूं. यह बहुत शर्मनाक स्थिति है. उन पुरुषों द्वारा किया गया कृत्य बलात्कार के दायरे में क्यों नहीं आता? मुझे इस फैसले के पीछे का तर्क समझ में नहीं आया. सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि पीड़िता को गलत तरीके से छूना और उसकी सलवार का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार का प्रयास नहीं माना जाएगा, बल्कि गंभीर यौन उत्पीड़न माना जाएगा. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह बात पवन और आकाश पर लगे आरोपों की सुनवाई करते हुए कही थी. इन दोनों पर उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 वर्षीय पीड़िता को गलत करीके से छूना, उसके पायजामा का नाड़ा तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करने का आरोप है.

पॉक्सो एक्‍ट की धारा 18 नहीं... 

कासगंज ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर पवन और आकाश को शुरू में बलात्कार के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्‍ट की धारा 18 के तहत मुकदमा चलाना था. हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने निर्देश दिया कि आरोपियों पर धारा 354-बी आईपीसी (निर्वस्‍त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत मुकदमा चलाया जाए. पीठ ने कहा, 'आरोपी पवन और आकाश के खिलाफ लगाए गए आरोप और मामले के तथ्य शायद ही मामले में बलात्कार के प्रयास का अपराध बनाते हैं. बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाने के लिए अभियोजन पक्ष को यह स्थापित करना होगा कि यह तैयारी के चरण से आगे निकल गया था. तैयारी और अपराध करने के वास्तविक प्रयास के बीच का अंतर मुख्य रूप से दृढ़ संकल्प की अधिक डिग्री में होता है.'

Advertisement
Featured Video Of The Day
Mic On Hai | Iran Israel War: 24 घंटे में ईरान पर भयंकर एयरस्ट्राइक! | Sucherita Kukreti | NDTV
Topics mentioned in this article