यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का हाल लेने लखनऊ नहीं आ पा रहीं उमा भारती, ट्वीट कर बताई वजह

उमा ने आगे लिखा कि कल्याण सिंह भाजपा के उन चंद नेताओं में से हैं जो आज की सशक्त भाजपा के बनाने के लिए जिनको श्रेय जाता है. हिंदुत्व एवं पिछड़े वर्गों का मेल करना भाजपा के लिए असंभव था इसी मेल के कारण भाजपा केंद्र एवं राज्यों में अपनी सरकारें बना पाई है.

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उमा भारती ने बताया- कल्याण सिंह की तबीयत का हाल लेने क्यों नहीं जा पा रहीं
नई दिल्ली:

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की लखनऊ के अस्पताल में भर्ती हैं. बीजेपी नेता उमा भारती ने कल्याण सिंह का हालचाल लेने न आने पर दुख जताया है. बता दें कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और बिहार के मंत्री शाहनवाज हुसैन भी उनका हालचाल लेने आ चुके हैं. उमा भारती ने ट्वीट किया है कि भाजपा के कद्दावर नेता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी के स्वास्थ्य को लेकरचिंतित हूं.  मैं लखनऊ उनको मिलने नहीं आ पा रही हूं, क्योंकि उत्तराखंड में गंगा किनारे मेरे गुरु जी के स्थान पर गुरु पूर्णिमा तक गंगा जी की अर्चना हो रही है, जिसकी प्रमुख यजमान मैं स्वयं हूं, इसलिए मैं इस स्थान को गुरु पूर्णिमा तक छोड़ नहीं सकती.

उमा ने आगे लिखा कि कल्याण सिंह जी भाजपा के उन चंद नेताओं में से हैं जो आज की सशक्त भाजपा के बनाने के लिए जिनको श्रेय जाता है. हिंदुत्व एवं पिछड़े वर्गों का मेल करना भाजपा के लिए असंभव था इसी मेल के कारण भाजपा केंद्र एवं राज्यों में अपनी सरकारें बना पाई है.  जिन चंद नेताओं ने यह चमत्कार करके दिखाया उसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं मेरे पिता तुल्य बड़े भाई कल्याण सिंह जी प्रमुख रहे. पिछड़े वर्गों, दलित एवं हिंदुत्व का मेल को मैंने नाम दिया है राम रोटी. यही भारत के उत्कर्ष का मंत्र है तथा यही मंत्र भारत में राम राज्य लाएगा इस राम रोटी की विचारधारा के अगुआओं में कल्याण सिंह जी प्रमुखता से रहे. मैं गंगा के किनारे से अपने पिता तुल्य बड़े भाई श्री कल्याण सिंह जी के दीर्घायु होने की कामना करती हूं.

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बता दें कि उमा भारती और कल्याण दोनों का राजनीति में उभार सोशल इंजीनियरिंग के तहत हुआ. दोनों पिछड़े वर्ग से आते हैं. कल्याण सिंह और उमा भारती को क्रमश: उत्तर प्रदेश और एमपी के नेतृत्व के लिए तैयार किया गया. राम मंदिर आंदोलन के दौरान जहां कल्याण सिंह कारसेवकों पर गोली न चलवाने के लिए जाने गए और बाबरी मस्जिद की सुरक्षा न कर पाने के लिए अपनी कुर्सी गंवाई वहीं उमा भारती ने बाबरी विध्वंस के बाद एक आरोपी की तरह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, हालांकि दोनों को राम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया था.
 

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