UGC नियम पर सवर्ण सेना का हंगामा, दो घंटे का ड्रामा, 15 दिन की डेडलाइन दी

UGC के नए नियमों के विरोध में सवर्ण सेना के कार्यकर्ता कड़ी सुरक्षा के बीच UGC हेड ऑफिस पहुंचे और करीब दो घंटे प्रदर्शन किया. संगठन ने कहा कि अगर सरकार सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों पर ठोस आश्वासन दे दे तो आंदोलन टाल देंगे.

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  • दिल्ली में UGC कार्यालय के बाहर सवर्ण सेना के कार्यकर्ताओं ने नए नियमों के खिलाफ दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन
  • UGC चेयरमैन विनीत जोशी ने सवर्ण सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर 15 दिन की मोहलत दी गई है
  • सवर्ण सेना का आरोप है कि नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ उल्टा भेदभाव बढ़ सकता है
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नई दिल्ली:

दिल्ली में कड़ी सुरक्षा के बीच सवर्ण सेना के कार्यकर्ता मंगलवार सुबह UGC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए. सुबह 10 बजे से ही दिल्ली पुलिस ने UGC हेड ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी थी, लेकिन इसके बावजूद सवर्ण सेना के कुछ सदस्य बैरिकेड पार कर परिसर के पास तक पहुंच गए. करीब ढाई घंटे तक चला यह विरोध प्रदर्शन कई दौर की नारेबाजी और हंगामे के बीच जारी रहा.

UGC चेयरमैन की सवर्ण सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात

आखिरकार UGC चेयरमैन विनीत जोशी ने सवर्ण सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जिसके बाद प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया. सवर्ण सेना ने UGC को 15 दिन की मोहलत देते हुए कहा कि अगर नया नियम वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. सवर्ण सेना के सह‑संस्थापक शिवम सिंह ने कहा कि अगर सरकार ठोस आश्वासन दे दे कि सामान्य वर्ग के छात्रों का अहित नहीं होगा तो हम आंदोलन टाल देंगे.

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सवर्ण सेना और कुछ जातीय संगठनों का क्या आरोप

उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसरों में जातिगत भेदभाव मौजूद नहीं है. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि 2017‑18 में 173 और 2023‑24 में 378 जातीय भेदभाव की शिकायतें क्यों दर्ज हुईं, तो वह इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए. सवर्ण सेना और कुछ जातीय संगठनों का आरोप है कि UGC के नए नियम से रिवर्स बायस यानी उल्टा भेदभाव बढ़ सकता है. उनका कहना है कि नियम केवल SC, ST और OBC छात्रों के लिए सुरक्षा प्रावधान देता है.

सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए किसी शिकायत निवारण का स्पष्ट प्रावधान नहीं है. झूठी शिकायतों के खिलाफ दंडात्मक धाराएं हटाई गई हैं. इससे निर्दोष छात्रों या शिक्षकों के खिलाफ गलत कार्रवाई हो सकती है. इसके अलावा, विश्वविद्यालयों में ‘इक्विटी स्क्वॉड' और निगरानी तंत्र बनाए जाने को शिक्षाविद “सर्विलांस कल्चर” बता रहे हैं, जिससे शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका है.

मंत्री जीतन राम मांझी ने नए नियम का समर्थन किया

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने UGC के नए नियम का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही जातिगत भेदभाव की शिकायतों के कारण यह कदम उठाया गया है, और नियम छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं.

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वामपंथी संगठनों ने भी उठाए सवाल

वामपंथी छात्र संगठन AISA ने UGC के नियमों का सैद्धांतिक समर्थन तो किया, लेकिन कई प्रावधानों पर सवाल उठाए. संगठन का कहना है कि समानता समिति (Equity Committee) में दलित, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं की अनिवार्य हिस्सेदारी का स्पष्ट निर्देश नहीं है. जबकि आंकड़ों के अनुसार जातीय भेदभाव के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है. AISA ने मांग की कि समितियों में SC/ST, OBC और महिलाओं को ही शामिल किया जाए ताकि शिकायतों का सही निपटारा हो सकें

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UGC ऑफिस के बाहर दो घंटे का तनावपूर्ण माहौल

UGC के बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने सरकार और UGC से नियमों को वापस लेने की मांग की. पुलिस ने हालात को नियंत्रित रखा, हालांकि थोड़े समय तक माहौल तनावपूर्ण रहा. मुलाकात के बाद सवर्ण सेना ने अस्थायी रूप से विरोध खत्म कर दिया लेकिन 15 दिन बाद फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है.

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